शनिवार को अतिरिक्त जिला सेशन जज डॉ. चंद्र हास की अदालत ने नाबालिग भतीजी से दुष्कर्म करने वाले 23 साल के चाचा त्रिलोक सिंह को सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही उसके ऊपर दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न अदा करने पर उसे दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
12 अप्रैल 2018 को जिले के एक गांव की नाबालिग छात्रा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई कि मैंने आठवीं कक्षा के पेपर दिए हैं। तीन अप्रैल 2018 को वह तंदूर पर रोटियां पकाने अपने चाचा त्रिलोक सिंह के घर पर गई। जब वह रोटियां पका रही थी तो घर पर कोई नहीं था। जब वह रोटियां पका कर घर वापस जाने लगी तो इतने में उसका चाचा त्रिलोक सिंह आ गया। उसने मुझे अंदर चलने के लिए कहा। मैं नहीं गई तो वह धक्के से मुझे अंदर ले गया और मेरे साथ जबरदस्ती की। मैंने शोर मचाया तो उसने मेरा मुंह बंद कर दिया। मैंने शर्म के मारे घर पहुंचने पर इस घटना की जानकारी किसी को नहीं दी।
इसके बाद उसकी नानी उसे उसके नाना के घर पर ले गई। कुछ दिनों बाद मुझे मेरी मां नाना के घर से वापस ले आई। इसके बाद मैंने हिम्मत करके पूरी घटना अपनी मां को बताई। जिस पर नाबालिग की मां 12 अप्रैल 2018 को उसे पुलिस थाने में लेकर गई और शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर घटनास्थल का निरीक्षण किया और आरोपी चाचा त्रिलोक सिंह के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
शनिवार को अतिरिक्त सेशन जज डॉ. चंद्र हास की अदालत ने आरोपी चाचा त्रिलोक के खिलाफ गवाहों व सबूतों को आधार मानते हुए उसे सात साल की सजा सुनाई। सात ही उसे दस हजार का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न भरने पर उसे दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।