डीजीपी दिनकर गुप्ता ने खुलासा किया कि पुलिस से संबंधित 21 सेवाएं अब राज्य भर में 516 सेवा केंद्रों में भी मुहैया होंगी। इनमें पासपोर्ट के लिए पड़ताल, हथियार लाइसेंस के लिए पड़ताल, विदेशियों का पंजीकरण, एनओसी जारी करना, लापता रिपोर्टों आदि की कॉपी शामिल हैं। पहले ये सेवाएं सिर्फ 294 सांझ केंद्रों से मिलती थीं।
पिछली सरकार ने सफेद हाथी बना दिए थे सेवा केंद्र : कैप्टन
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया कि पिछली सरकार द्वारा लगभग 2144 सेवा केंद्र चलाए जा रहे थे। उन्होंने इन केंद्रों को सफेद हाथी बना दिया था। उनमें स्टाफ कम होने के साथ-साथ सेवाएं देने में भी ढिलाई बरती जाती रही। इन सेवा केंद्रों में केवल 170 सरकारी सेवाएं मिलती थीं। इसके अलावा इनके निर्माण के लिए 400 करोड़ रुपये अंधाधुंध खर्च किए गए और इन केंद्रों को चलाने पर राज्य सरकार को सालाना 250 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते थे।
कैप्टन ने बताया कि उनकी सरकार ने ‘यूनिफाइड सर्विस डिलिवरी सेंटर’ (एकीकृत सेवा केंद्र) स्थापित करने का फैसला लिया था। इसके साथ ही मौजूदा सभी केंद्रों- सुविधा केंद्रों, सांझ केंद्रों, फर्द केंद्रों का विस्तार करते हुए इनका पूर्ण तौर से कंप्यूटरीकृत और डिजिटलाइजेशन करने का फैसला लिया गया। सेवा केंद्रों की संख्या 2147 से घटाकर 516 कर दी गई है। इन केंद्रों को ठेका आधारित मॉडल के साथ अपना खर्च खुद जुटाने के योग्य बनाया गया। इससे राज्य सरकार को सालाना छह करोड़ रुपये की आमदनी शुरू हो गई।
516 सेवा केंद्र कार्यरत, 50 हजार युवाओं को मिला रोजगार
मुख्यमंत्री को सेवा केंद्रों की मौजूदा स्थिति की जानकारी देते हुए प्रशासनिक सुधारों के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी ने बताया कि राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 516 सेवा केंद्र हैं। यहां रोजाना 60,000 लोगों की आमद होती है और 50,000 नौजवानों को रोजगार मिला है। यह केंद्र 327 सरकारी सेवाएं मुहैया करवाने के अलावा फोटोस्टेट, कोरियर, डायरेक्ट मनी ट्रांसफर, फास्टैग, पैन कार्ड, टिकट (बस और ट्रेन) की सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।