गर्भवती महिलाओं में कोविड-19 के फैलाव को रोकने को यकीनी बनाने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा पॉजिटिव पाई जाने वाली गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी के लिए सभी जिला अस्पतालों में अलग लेबर रूप स्थापित किए गए हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान कोविड टेस्ट अनिवार्य किया गया है, जिसके अंतर्गत अप्रैल महीने तक 12479 गर्भवती महिलाओं की कोविड के लिए जांच की गई, जिनमें से 118 महिलाएं पॉजिटिव पाई गईं। पिछले तीन महीनों के दौरान 56 सफल डिलीवरियों में से 20 सामान्य और 36 ऑपरेशन के साथ कीं।
पटियाला जिले ने गर्भवती महिलाओं के 1715 टेस्ट करवाकर बेहतरीन कारगुजारी दिखाई, जिनमें से 61 महिलाएं पॉजिटिव पाई गईं। पटियाला में अब तक 16 प्रसूतियां सुरक्षित ढंग से की गईं हैं। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा अलग लेबर रूम स्थापित करने के अलावा सिविल सर्जनों को इस संबंधी जारी की गई एसओपीज के अनुसार जिला अस्पतालों में प्रभावित मरीजों के लिए एक समर्पित ऑपरेशन थिएटर स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की समूचे टीमें क्लिनीकल प्रबंधन, स्क्रीनिंग और टेस्टिंग आदि जरूरी प्रबंधों को यकीनी बनाने के लिए दिन-रात काम कर रही है। राज्य सरकार ने कोरोना के मरीज़ों को इलाज सुविधाएं प्रदान कर रहे निजी अस्पतालों की उपचार दरें निर्धारित की हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के इस मुश्किल दौर में मरीजों की जान बचाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। पंजाब ने पड़ोसी राज्यों की तुलना में कोरोना के मामलों को कारगर ढंग से काबू किया है।
सिद्धू ने कहा कि अगर हर कोई सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना यकीनी बनाता है, तो कोरोना वायरस के सामूहिक फैलाव को आसानी से काबू किया जा सकता है। लॉकडाउन के अलावा पंजाब पहला राज्य है, जहां मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है, जिससे घनी आबादी में कोरोना के सामूहिक फैलाव को रोका जा सके।