ऐसे काम करेगा सेंसर...
चट्टानों के ऊपर वैज्ञानिकों की टीम सेंसर लगाएगी। यह सेंसर कंप्यूटर को बताएगा कि चट्टान हिल रही है। वैज्ञानिकों की टीम को पहले से पता है कि कोई भी चट्टान अचानक नहीं गिरती। पहले वह दो सेंटीमीटर हिलती है और उसके बाद यह क्रम बढ़ता रहता है। यह डाटा वैज्ञानिकों की टीम को कंप्यूटर के जरिए मिलेगा। इसका विश्लेषण कर रिसर्च टीम के वैज्ञानिक यह बता देंगे कि चट्टान किस समय गिरने वाली है। ऐसे में वाहनों आदि को पहले ही रोका जा सकेगा और आसपास के क्षेत्रों या आबादी को खाली करवाया जा सकेगा। भूस्खलन यानी मिट्टी खिसकना, उसमें भी यही तकनीक कारगर होगी। मालूम हो कि अगस्त 2015 में हिमाचल के मणिकर्ण में गुरुद्वारा सराय पर चट्टान अचानक गिर गई। इसमें सात से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। उसके बाद से सरकार ने इस पर काम करना शुरू कर दिया था।
कंप्यूटर के जरिए होगा डाटा विश्लेषण, अधिकारी करेंगे आगाह
वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि मणिकर्ण के डाटा का विश्लेषण एक कंप्यूटर के जरिए होगा। एक पहाड़ का विश्लेषण तो एक व्यक्ति कर लेगा, लेकिन हर जगह के पहाड़ों का विश्लेषण आसान नहीं होगा। ऐसे में वह कंप्यूटर का उपयोग कर सरकारी महकमे को जानकारी देंगे और अधिकारी लोगों को आगाह कर सकेंगे। इसके लिए सरकारें चाहें तो ऐसे क्षेत्रों में सायरन आदि भी लगा सकेंगी जो सेंसर से संचालित होंगे।
ये हैं भारत की प्रमुख पर्वत शृंखलाएं
सिक्कम-नेपाल के साथ लगता हिमालय, उत्तराखंड में हिमालय, जम्मू-कश्मीर की साल्तोरो काराकोरम, ससेर काराकोरम, रिमो काराकोरम, सियाचिन काराकोरम, जंस्कार, तिब्बत का पठार आदि हैं। इनसे 53 पर्वत निकले हैं जिनकी कम से कम ऊंचाई 500 मीटर से लेकर साढ़े आठ हजार मीटर है।
डीएसटी के प्रोजेक्ट के तहत रिसर्च से ऐसा सेंसर तैयार किया गया है जो पहाड़ों से गिरने वाली चट्टानों के बारे में पहले ही चेतावनी दे देगा। यह सेंसर प्रथम चरण में मणिकर्ण पर्वत की चट्टानों पर लगाए जाएंगे। यह एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में है, जिसे दूसरे पर्वतों पर भी लागू किया जा सकेगा। - डॉ. महेश ठाकुर, भूगर्भ विज्ञान विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़