श्री गुरु गोबिंद सिंह की पवित्र निशानियों को विशेष बस के जरिये पटियाला के गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब से बुधवार को नगर कीर्तन के रूप में प्रदेश भर की लाखों संगतों के दर्शनों के लिए ले जाया जाएगा।
यह विशेष बस सवा दो करोड़ की लागत से तैयार कराई गई है। रवानगी के मौके पर हवाई जहाज के जरिये इन निशानियों पर फूलों की वर्षा की जाएगी। नगर कीर्तन में हाथी व घोड़ों के साथ फौजी व पुलिस बैंड, गतका की टीमों व स्कूली स्टूडेंट्स भी हिस्सा लेंगे।
नगर कीर्तन के मद्देनजर शहर की सजावट करने, संगतों के लिए लंगर का प्रबंध करने के साथ-साथ सफाई व्यवस्था व आवाजाही को सुचारु रखने के इंतजाम किए गए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल समेत ओर भी कई कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे इन निशानियों को पंजाब भर में संगतों को दर्शन कराने के बाद 20 मई को तख्त श्री केसगढ़ साहिब में सुशोभित किया जाएगा।
लाखों की संगतों के मद्देनजर पटियाला पुलिस ने ट्रैफिक के पुख्ता प्रबंध किए हैं। एसएसपी गुरमीत सिंह चौहान के मुताबिक सरहंद की तरफ से आने वाले वाहनों में भारी वाहनों को सरहंद बाईपास से डीएमडब्लयू की तरफ को मोड़े जाएंगे।
बाकी वाहन हेमकुंट पेट्रोल पंप से फैक्टरी एरिया से होकर होटल फ्लाईओवर के नजदीक बस अड्डे की तरफ जाएंगे। यह प्रबंध सुबह सात बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक रहेंगे।
किला मुबारक की अलमारी में बंद थी 19 पवित्र निशानियां
राजपुरा रोड से आने वाले वाहनों में समाना व संगरूर जाने वाली वाहन बस स्टैंड के पुल के नीचे से होकर माल रोड से होकर फब्बारा चौक के जरिये जाएगे। सरहंद को जाने वाला ट्रैफिक काका होटल वाले मोड़ कट से होकर फैक्टरी एरिया जरिये चलेगा।
श्री गुरु गोबिंद सिंह पवित्र निशानियों में कंघा, केस, दस्तार, चोला साहिब, जपुजी साहिब, बड़ी किरपान, छोटी किरपान, हस्त लिखितें आदि शामिल हैं। यह निशानियां पहले नाभा के शाही परिवार के पास थीं।
शाही परिवार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करके इन निशानियों को योग्य स्थान पर संभालने की मांग की थी। इस पर हाईकोर्ट ने छह नवंबर 2009 को यह निशानियां श्री आनंदपुर साहिब भेजने के लिए कहा था। लेकिन एसजीपीसी ने प्रबंध करने के लिए हाईकोर्ट से समय मांगा।
इसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से अस्थायी तौर पर इन निशानियों को पटियाला के किला मुबारक में एक बंद अलमारी में रखवा दिया गया। सिख जत्थेबंदियों के संघर्ष के बाद 28 अप्रैल को इन निशानियों को एसजीपीसी ने अलमारी से निकाल कर गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब शिफ्ट किया था।