चंडीगढ़। डीआरडीओ के सरकारी दफ्तर में एक सिक्योरिटी अफसर को गंभीर हादसे के चलते 60 प्रतिशत दिव्यांगता का सामना करना पड़ा है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने उन्हें 15.08 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। यह राशि बस ड्राइवर, उसके मालिक और इंश्योरेंस कंपनी को 7.5 प्रतिशत ब्याज सहित चुकानी होगी। सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि 7 अप्रैल 2018 को याचिकाकर्ता ने टाटा से बिहार शरीफ की बस ली थी। 8 अप्रैल 2018 को सुबह 3 बजे कोडरमा (झारखंड) बस स्टॉप के पास पंजाब होटल के नजदीक रिफ्रेशमेंट के लिए रुके थे। चाय पीने के बाद जब धर्मेंद्र बस पर चढ़ने लगे तब ड्राइवर ने अचानक बस चला दी, जिससे वह फिसल गए और बस का अगला चक्का उनके पैर पर चढ़ गया। इस हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं, और कोडरमा (झारखंड) थाने में ड्राइवर के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। इसके बाद राम दरबार फेज-2 के निवासी शैलेष सिंह (46) ने बिहार नंबर की टाटा मोटर बस के ड्राइवर धर्मेंद्र कुमार, उसके मालिक रंजीत कुमार और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि हादसे के बाद वह काम करने में असमर्थ हो गए हैं और अपने परिवार पर निर्भर हैं। घटना के बाद उन्हें चिकित्सा और अन्य खर्चों का बोझ उठाना पड़ा। वहीं इंश्योरेंस कंपनी ने बताया कि ड्राइवर के पास उस समय वैध ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी और रूट परमिट नहीं थे जिससे पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ है, और इस कारण वे क्लेम के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। न्यायालय ने पीड़ित के पक्ष में फैसला दे दिया।