चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने लोगों की सुविधा के लिए सेक्टर-48 के अस्पताल में ओपीडी सेवा बहाल कर दी है, लेकिन स्थानीय लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। एक ही मर्ज के इलाज के लिए यहां आने वाले मरीजों को जीएमसीएच-32 भी जाना पड़ रहा है। बहाल ओपीडी सेवा बेकार साबित हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को अस्पताल में कम से कम एक ही मर्ज के इलाज की समुचित व्यवस्था शुरू करनी चाहिए ताकि मरीजों को परेशान न होना पड़ा।
सेक्टर-48 में एक दिसंबर 2022 से ओपीडी सेवा बहाल की जा चुकी है। मरीजों को सुबह 10 से 12 बजे तक परामर्श दिया जा रहा है। वहीं, इसके लिए सुबह 9 से 11 बजे तक पंजीकरण किया जा रहा है। ओपीडी के दौरान सैंपल कलेक्शन यानी जांच और एक्स-रे की सुविधा देने की बात कही गई थी, लेकिन मौजूदा समय में केवल नमूनों का संग्रह किया जा रहा है, जिसकी जांच जीएमसीएच 32 में हो रही है।
कैसे हो उद्देश्य पूरा
सेक्टर-48 में हॉस्पिटल को बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य 45, 46, 47, 49, 50, 51 जगतपुरा, फैदां, रामदरबार और मोहाली की जनता को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना था लेकिन सुविधा शुरू होने के बाद भी इस क्षेत्र की जनता के हाथ निराशा ही लगी है। अब भी चंडीगढ़ के उस क्षेत्र की बड़ी आबादी को इलाज कराने के लिए अपने घर से कई किमी दूर जाना पड़ रहा है। वहीं 48 का अस्पताल उस क्षेत्र की जनता के लिए हाथी का दांत बना हुआ है।
मानव संसाधन की कमी बनी परेशानी
सेक्टर-48 के अस्पताल को संचालित करने के लिए 74 डॉक्टर, 161 पैरा मेडिकल स्टाफ, 10 प्रशासनिक स्टाफ, एक ज्वाइंट कंट्रोलर, एक डिप्टी कंट्रोलर और एक सेक्शन अफसर की नियुक्ति की जानी थी, लेकिन अब तक तैनाती की प्रक्रिया लंबित है। ऐसे में जीएमसीएच-32 अस्पताल प्रशासन को अपने ही डॉक्टर और स्टाफ वहां तैनात करने पड़ रहे हैं।
विभाग ओपीडी
जनरल मेडिसिन: सोमवार और गुरुवार
जनरल सर्जरी: मंगलवार और शुक्रवार
बालरोग: बुधवार
हड्डीरोग: शनिवार
कोट-
जीएमसीएच 32 के डॉक्टर ही सेक्टर-48 के अस्पताल में ओपीडी संचालित कर रहे हैं। जहां तक जांच और एक्स-रे की बात है तो नमूनों का संग्रह अस्पताल में ही किया जा रहा है। जरूरत के हिसाब से पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का भी उपयोग किया जा रहा है।
-डॉ सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच 32
कोट-
सेक्टर-48 के अस्पताल में ओपीडी सेवा शुरू तो कर दी गई है लेकिन अब भी क्षेत्रीय जनता को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग को कम से कम एक या दो विभाग को पूरी तरह से वहां संचालित करना चाहिए, ताकि लोगों को एक ही मर्ज के इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर न काटने पड़े।
-जेजे सिंह, सेक्टर-48 रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान