चंडीगढ़। सेक्टर-45 स्थित गोशाला में रविवार को गाय के गोबर से बने दीयों का वितरण शुरू हो गया है। दिवाली के उपलक्ष्य में करीब 40 हजार दीये वितरित किए गए। गोशाला के 10 से अधिक सेवादारों ने लोगों को ये दीए मुफ्त में बांटे। गोशाला में बने मंदिरों में चढ़ाए जानेवाले कपड़ों के थैले और काजग के लिफाफा में हर गो भक्त को सात सात दीये दिए जा रहे हैं। यहां पर ट्राइसिटी से भक्त दीये लेने के लिए पहुंचे। जिन लोगों ने अधिक मांगा उन्हें अधिक दीये भी प्रदान किए गए। सोमवार को भी दीयों का वितरण होगा।
करीब 75 हजार गोबर के दीये बनाए गए हैं। सेक्टर-45 की गोशाला को संचालित करने वाली संस्था गौरी शंकर सेवादल के चेयरमैन सुमित शर्मा ने बताया कि हर वर्ष की तरह भी इस वर्ष दीपावली पर घरों को जगमग रोशनी करने के लिए जलाए जाने वाले मिट्टी के दीयों की जगह पर आप सभी इस बार गोबर के दीयों से घर आंगन को रोशन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि गोबर के दीये सेक्टर-45 स्थित गोशाला में उपलब्ध हैं। गोशाला में गोबर के दीये बनाए गए हैं। गाय के गोबर से लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति भी बनाई गई है जो लोगों को प्रदान किया जा रहा है। संस्था के उप प्रधान विनोद कुमार ने बताया कि इको फ्रेंडली दिवाली होने से चंडीगढ़ के लोगों को अधिक दीए दिए देने का लक्ष्य है।
गाय के गोबर में मिलाते हैं हवन सामग्री
गौरी शंकर सेवादल के प्रधान रमेश कुमार शर्मा निक्कू ने बताया कि गो माता के गोबर से दीपक बनाने के लिए पहले गाय के गोबर को इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद गोबर को एक बड़े बर्तन में रखकर हाथों से मिलाया जाता है। इसमें हवन सामग्री जटामांसी, पीली सरसों और लालचंद बुरादा मिलाई जाती है। सभी चीजें चीजें मिश्रण कर दीया पक्का खूबसूरत आकार दिया जाता है। इस दीया के जलने से घर में हवन की खुशबू आएगी और वातावरण शुद्ध रहेगा। दीपावली में इसका उपयोग करने के बाद जैविक खाद बनाने उपयोग में लाया जा सकता है। इसे घर के गमलों में भी डाल सकते हैं। उन्होंने शहर के लोगों से अपील की है कि अधिक से अधिक लोग गाय के गोबर से बने दीया अपने घरों में ले जाएं।