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Chandigarh News: एक साल से डॉक्टरों की तलाश जारी, अल्ट्रासाउंड मशीन चादर ओढ़ाकर किनारे रखी

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चंडीगढ़। एक तरफ तो सरकारी अस्पतालों में उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा देने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ हकीकत यह है कि स्वास्थ्य विभाग 14 महीनों में एक रेडियोलॉजिस्ट की तलाश पूरी नहीं कर पाया है। इससे एक नहीं दो-दो सिविल अस्पतालों में एक साल से ज्यादा समय से अल्ट्रासाउंड बंद हैं। यह मनीमाजरा और सेक्टर-45 का सिविल अस्पताल है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन दोनों अस्पतालों में जननी सुरक्षा योजना का संचालन हो रहा है। लेकिन वहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए इस अस्पताल से उस अस्पताल चक्कर लगवाया जा रहा है। आला अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों की तलाश जारी है। लेकिन हकीकत में इन दोनाें अस्पतालों के अल्ट्रासाउंड मशीन को चादर ओढ़ाकर एक किनारे रख दिया गया है। ठीक यही स्थिति बच्चों के डॉक्टरों के साथ भी है। मनीमाजरा में ओपीडी में तो बालरोग विशेषज्ञ है, लेकिन एमरजेंसी में कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि सेक्टर 45 के सिविल अस्पताल में तो एक भी बालरोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं।
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बता दें कि मनीमाजरा के सिविल अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट ने 3 अक्तूबर 2022 को नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद से अब तक वहां के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं मिल पाया है। यही हाल सेक्टर 45 के सिविल अस्पताल का भी है। वहां भी रेडियोलॉजिस्ट नौकरी छोड़कर जा चुके हैं। लेकिन उसके लिए भी कोई विशेषज्ञ नहीं मिल पाया है। कमियों पर पर्दा डालने का ये आलम है कि सेक्टर- 45 के सिविल अस्पताल में डॉक्टर नहीं है फिर भी उसे कायाकल्प में पहला स्थान मिल चुका है।
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28 वर्षों से खाली पड़े हैं 91 पद

बता दें चंडीगढ़ में डॉक्टरों के लगभग 91 पद 28 वर्षों से खाली पड़े हैं। प्रशासन उसे भरने में असफल होने के कारण डेपुटेशन के सहारे स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए लगातार नई नियुक्ति के लिए विज्ञापन भी जारी किए जा रहे हैं लेकिन उन पदों पर तैनाती के लिए विशेषज्ञ नहीं मिल रहे। इस वजह से यूटी प्रशासन ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से डेपुटेशन पर डॉक्टर बुलाए गए हैं।
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ऑन कॉल सेवा देने की थी तैयारी
विशेषज्ञों की कमी को ध्यान में रखकर ही पिछले स्वास्थ्य सचिव ने ऑन कॉल सेवा उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। जिसके अंतर्गत रेडियोलॉजिस्ट को प्रत्येक केस के लिए तय पेमेंट करना था। लेकिन वह योजना भी सिरे नहीं चढ़ सकी। दूसरी तरफ चंडीगढ़ में पिछले 8 से 10 महीनों में डेपुटेशन पर लगभग 80 डॉक्टर बुलाए जा चुके हैं। इनमें पैथोलॉजिस्ट, सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, प्लास्टिक सर्जन, बेहोशी के डॉक्टर, बाल रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ के साथ डेंटल सर्जन शामिल हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों की कमी दूर नहीं हो पा रही है।

जनता को मूर्ख बनाने का हो रहा काम
अल्ट्रासाउंड ही नहीं सरकारी अस्पतालों में हर स्तर पर जनता को मूर्ख बनाने का काम हो रहा है। इस एक उदाहरण से इसका साफ पता चल रहा है कि किस हद तक अनदेखी का आलम है। एक दो दिन नहीं एक साल से डॉक्टर नहीं है और विभाग इसकी व्यवस्था करने में नाकाम साबित हो रहा है।
-निखिल चौधरी, सेक्टर 48

अपनाया जा रहा है लापरवाह रवैया
मनीमाजरा सिविल अस्पताल से इस क्षेत्र के हजारों लोगों की सेहत जुड़ी है। अगर इतने बड़े क्षेत्र को लेकर इस तरह से लापरवाह रवैया अपनाया जा रहा है तो छोटे सेंटरों की स्थिति का तो अनुमान ही लगाया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जनता की परेशानी से कोई लेना-देना नहीं है।
-सौरभ कुमार, मनीमाजरा
कोट..
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाने की सारी सुविधा मौजूद है लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण अभी यह सुविधा लोगों को नहीं मिल रही है। इसके लिए जल्द प्रबंध किए जा रहे हैं। -डॉ. संदीप टंडन, सीएमओ, मनीमाजरा हॉस्पिटल
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