प्रशासन ने पिछले 3 साल की औसत निकाली है, जिसमें पता चला है कि बार्डर के किनारे जमीनों की रजिस्ट्रियां बहुत कम रेट पर हुई हैं। जमीन का जो सही रेट है, वह भी यहां पर कम है। किसान अपनी जमीनों के लिए करोड़ों रुपये के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। एसडीएम ने बताया कि जिन जिलों में जमीन के रेट के हिसाब से किसान अपनी जमीनों के मूल्यों की मांग कर रहे हैं, उनका रिकॉर्ड भी उन्होंने मंगवाया है, ताकि देखा जाए कि किस हिसाब से जमीनों का मूल्य है।
एसडीएम ने बताया कि क्षेत्र में 25-30 लाख रुपये प्रति किले जमीन की कीमत है, मगर किसान इसे उचित नहीं मान रहे। वहीं किसानों ने कहा कि सरकार उन्हें मार्केट रेट के हिसाब से उनकी जमीनों का मोल दे। उनके लिए सरकार पहले ही प्रबंध करे। सरकार ने अभी तक जमीनों का कोई मूल्य तय नहीं किया है। आज की मीटिंग में जमीनों के रेट संबंधी बातचीत की जानी थी, जो सिरे नहीं चढ़ी है।
किसानों की मांग है कि जो तरनतारन से जंडियाला को रोड निकला है, उसमें आती जमीनों का जो मूल्य किसानों को मिला है, उसके हिसाब से श्री डेरा बाबा नानक में भी किसानों को उनकी जमीनों का मूल्य दिया जाए। किसानों ने कहा कि वह सरकार से प्रति किला कम से कम 88 लाख रुपये देने की मांग करते हैं। किसानों ने कहा कि अगर उनकी इस संबंधी सरकार से सहमति नहीं होती तो वह अगली रुपरेखा तैयार करेंगे।