डेढ़ लाख रुपये रिश्वत मामले में सेक्टर-27 स्थित सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के वैज्ञानिक दिनेश तिवारी ने शुक्रवार को सीबीआई अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। साइंटिस्ट ने याचिका में उल्लेख किया है कि उनका नाम एफआईआर में नहीं है। उनकी रिश्वत लेने के मामले में किसी प्रकार की भूमिका नहीं है। उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया जा रहा है।
सीबीआई ने बिना किसी पुख्ता सबूत के उनके खिलाफ चालान पेश किया है, जोकि झूठ और गलत है। उनके खिलाफ की गई जांच बेबुनियाद है। वह जांच में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं। यह तथ्य पेश करते हुए उन्होंने अग्रिम जमानत की मांग की है।
याचिका के आधार पर अदालत ने नोटिस जारी कर सीबीआई से जवाब मांगा है। मामले में दो वैज्ञानिक ज्ञानेंद्र राय और दिनेश तिवारी का नाम बाद में जोड़ा गया था। मामले के अन्य आरोपी ज्ञानेंद्र राय को सीबीआई अदालत से जमानत मिल चुकी है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। दरअसल, अक्तूबर 2013 में गुरुग्राम के एक प्राइवेट बॉटलिंग प्लांट की एनओसी की फाइल सेक्टर-27 स्थित सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड भेजी गई थी।
इस फाइल को हाइड्रोलॉजिस्ट संजय पांडे को क्लीयर करना था। आरोप के मुताबिक फाइल को क्लीयर करवाने के लिए कंपनी के डायरेक्टर स्वराज कंडोई की इमटेक के साइंटिस्ट चंद्र प्रकाश मिड्ढा के जरिए संजय पांडे के साथ दो लाख रुपये में बात हुई थी। स्वराज कंडोई ने रिश्वत के डेढ़ लाख रुपये अपने एक कर्मचारी दिनेश कुमार के हाथ चंडीगढ़ भेजे।
रिश्वत की रकम चंद्र प्रकाश मिड्ढा के घर पर पहुंचाने की बात हुई थी। दिनेश रिश्वत लेकर सेक्टर-39 स्थित इमटेक के साइंटिस्ट मिड्ढा के घर पहुंचा था, जहां सीबीआई ने पहले ही ट्रैप लगाया हुआ था और रिश्वत की रकम के साथ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद मई 2020 में मामले से संबंधित चालान पेश किया गया था। इसमें सेक्टर 5 स्थित सेंट्रल ग्राउंड वाटर के दो वैज्ञानिक के नाम जोड़े गए थे।