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ड्रग्स केस में 'आप' नेता सुखपाल खैरा को राहत, SC ने जारी समन पर लगाई रोक

Fri, 01 Dec 2017 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Sukhpal Singh Khaira - फोटो : File Photo
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ड्रग्स तस्करी के एक मामले में आप नेता और पंजाब में विपक्ष के नेता सुखपाल सिंह खैरा को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन पर रोक लगा दी। 2015 के सीमा पार तस्करी मामले में पंजाब के फाजिल्का कोर्ट ने 30 नवंबर को समन जारी करते हुए खैरा को 21 दिसंबर को पेश होने को कहा था। 
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जस्टिस एनवी रमण और ए अब्दुल नजीर ने खैरा की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के समन रद करने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार के वकील से कहा कि ट्रायल कोर्ट आगे की प्रक्रिया रोक दी जाए। फाजिल्का कोर्ट ने इससे पहले खैरा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था, लेकिन होई कोर्ट ने उसे रद्द कर दिया। पर 17 नवंबर को हाईकोर्ट ने समन को रद्द नहीं किया। 

इस साल 31 अक्तूबर, को फाजिल्का कोर्ट ने इस मामले में नौ लोगों को जेल की सजा सुनाई थी। ये लोग नौ मार्च, 2015 को दो किलो हेरोइन, 24 सोने के बिस्कुट और देसी पिस्टल के साथ पकड़े गए थे। इस एफआईआर में खैरा का भी नाम है। खैहरा का कहना है कि यह उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश है।
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हाईकोर्ट में नहीं हो सकी शुक्रवार को सुनवाई

सुखपाल खैरा - फोटो : File Photo
आम आदमी पार्टी के विधायक व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल सिंह खैरा की सीबीआई जांच की याचिका री-ओपन करवाने की मांग पर शक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई नही हो पाई। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एएस आनंद की मृत्यु के कारण बार एसोसिएशन द्वारा वर्क सस्पेंड करने के कारण अर्जी पर सुनवाई नहीं हुई।

खैरा ने अर्जी दायर कर कर ड्रग मामले की सीबीआई या अन्य निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवाने की मांग की है। खैरा ने मांग की है कि उनसे पूछताछ या गिरफ्तार करने से पहले उन्हें एक महीने का नोटिस दिया जाए और उनकी और उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। वर्ष 2015 में हाईकोर्ट में खैरा द्वारा दायर याचिका का हाईकोर्ट ने इसी वर्ष मार्च में निपटारा किया था।

वर्ष 2015 में खैरा ने दायर याचिका में कहा था कि पंजाब सरकार फर्जी मामले दर्ज कर उन्हें फंसाना चाहती है। लिहाजा उन्हें किसी भी मामले में पूछताछ करने या उनके खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले उन्हें एक महीने का नोटिस दिया जाए। तब वे कांग्रेस में थे। मार्च में उन्होंने यह याचिका वापस ले ली थी।
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