चंडीगढ़। भारतीय रंगमंच और फिल्म अभिनेता और निर्देशक सतीश कौशिक नहीं रहे, उनके जाने से कला जगत और उनके फैंस गमगीन हैं। बेशक वह दुनिया से चले गए हों, लेकिन अपने अभिनय से लोगों के दिल में हमेशा जिंदा रहेंगे। वे हर उम्र, हर वर्ग और धर्म के लोगों के चहेता कलाकार थे। उन्होंने अपने हास्य से हर वर्ग को खूब हंसाया। उनकी अदाओं की लोग नकल करते थे। कोई भी फिल्म हो उसमें हास्य से जान डाल देते थे। अभिनेता सतीश कौशिक थिएटर फॉर थिएटर (टीएफटी) की ओर से आयोजित थिएटर फेस्टिवल में नाटक का मंचन किया था। उन्होंने वर्ष 2009 में टैगोर थिएटर के रेनोवेशन के बाद पहला नाटक किया था। नाटक ‘सेल्समैन रामलाल’ में उन्होंने लीड रोल किया था। इसमें सीमा विश्वास ने भी रोल निभाया था। ऐसा पहली बार था कि सतीश कौशिक टैगोर थिएटर मेें सेट मुंबई से लेकर आए थे और डबल स्टोरी सेट के साथ नाटक का मंचन हुआ था। टीएफटी के निर्देशक सुदेश शर्मा ने कहा कि उनके निधन से कला जगत और कला प्रेमियों को गहरा दुख हुआ है। सतीश कौशिक को चंडीगढ़ से अत्यधिक प्रेम था। वह हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के धनौंदा गांव के रहने वाले थे। टीएफटी विंटर नेशनल थियेटर फेस्टिवल 2009 में सतीश कौशिक के निर्देशन में नाटक सेल्समैन रामलाल की सफल प्रस्तुति का मंचन हुआ था। सतीश कौशिक ने अपने सहज अभिनय तथा निर्देशन से चंडीगढ़ के दर्शकों को खूब हंसाया और रुलाया भी था।
कलाकार सुदेश शर्मा ने बताया कि सतीश कौशिक और उन्होंने करीब सात वर्ष लख्मीचंद परफॉर्मिंग आर्ट यूनिवर्सिटी रोहतक में कार्यकारी सदस्य के तौर पर कार्य किया। वर्ष 2016 में हरियाणा की स्वर्ण जयंती के अवसर पर भी हरियाणा फिल्म पॉलिसी तथा अन्य कई विषयों पर इकट्ठे कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। वे दोस्तों के दोस्त थे। एक बार मिल लिए तो वे कभी नहीं भूलते थे।
बेहद संजीदा इंसान थे सतीश कौशिक
सतीश कौशिक संजीदा इंसान थे। किसी को हंसाने के लिए हमेशा संजीदा होना पड़ता है। उनकी फिल्म देखकर बहुत कुछ सीखने को मिलता था। एक बार फिल्म एसोसिएशन की बैठक में शामिल होने का मौका मिला था। बहुत ही मिलनसार थे। उनके मन में घमंड नहीं था। इतने बड़े अभिनेता होने के बाद सभी से मिलते थे। यही उनकी खासियत थी। उनके चले जाने से शून्य पैदा हो गया है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
-विनोद शर्मा फिल्म, टीवी एवं थिएटर कलाकार
दिग्गज कलाकार थे सतीश कौशिक
वे पंजाब कला भवन में आए थे। हरियाणा के कलाकार सतीश कौशिक ने अपनी कला से मुंबई में धाक जमाई। ऐसे कलाकारों से प्रेरणा मिलती है। वे कलाकारों के प्रेरणास्रोत हैं। उनका असमय चले जाना सभी को रूला दिया है। वे हमारे दिलों में रहेंगे।
-बीएन शर्मा, फिल्म कलाकार