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दमदमी टकसाल की दिल से इज्जत करता हूं: संत ढडरियां वाले

Wed, 25 May 2016 10:27 AM IST
रिंपी गुप्ता/अमर उजाला, पटियाला
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संत रंजीत सिंह ढंडरियावाले - फोटो : अमर उजाला
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पटियाला-संगरूर रोड स्थित गुरुद्वारा परमेश्वर द्वार के संत रणजीत सिंह ढडरियां वाले ने कहा कि वह कभी दमदमी टकसाल के खिलाफ नहीं बोले। टकसाल की उन्होंने हमेशा इज्जत की है और करते रहेंगे।  उन्होंने आगे कहा कि टकसाल के चार प्रमुख हैं इसलिए अन्य किसी भी टकसाल प्रमुख ने कभी नहीं कहा कि वह टकसाल के खिलाफ बोले हैं न ही टकसाल की बेइज्जती है।
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ऐसी मनगढ़ंत कहानियां डालकर लुधियाना में हुए हमले की घटना पर मिट्टी डालने की कोशिश की जा रही है लेकिन ऐसा होने नहीं दिया जाएगा। संत ढडरियां वाले मंगलवार को लुधियाना हमले पर दमदमी टकसाल जत्था भिंडरां महिता टकसाल प्रमुख और संत समाज के प्रधान बाबा हरनाम सिंह खालसा की ओर से दिए तीखे बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे

संत ढडरियां वाले ने कहा कि लुधियाना में हुई दुखदायी घटना का न तो सियासीकरण होने दिया जाएगा और न ही किसी भी सियासी लीडर को इस मामले की अगुवाई करने दी जाएगी। एक सवाल के जवाब में संत ढडरियां वाले ने कहा कि संगत काफी समझदार है और आने वाले विधानसभा चुनाव में किसने किस को वोट डालनी है जानती है। वह इस मामले में संगत को कोई भी दिशा-निर्देश नहीं देंगे और न ही कोई सियासी आदेश देंगे।
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उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति चाहे कुछ भी कहे लेकिन इस मामले के असली मास्टर माइंड को नजरअंदाज नहीं होने दिया जाएगा। उसे हर हाल में संगत के सामने लाया जाएगा। इसके लिए 26 मई का दिन आखिरी होगा और उससे पहले मास्टरमाइंड गिरफ्तार करना होगा। उन्होंने साफ किया कि अगर ऐसा न हुआ तो अगले संघर्ष के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी और इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

गौरतलब है कि लुधियाना हमले के करीब हफ्ते बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए हेड क्वार्टर गुरुद्वारा गुरदर्शन प्रकाश महिता में बाबा हरनाम सिंह ने जहां घटना संबंधी पकड़े व्यक्तियों व गाड़ी को टकसाल से संबंधित होना माना था वहीं उन्होंने घटनाक्रम को अंजाम देने वालों के टकसाल से जुड़े जज्बात की सराहना की थी।

बाबा हरनाम सिंह ने आरोप लगाया था कि संत ढडरियां वाले लंबे समय से दमदमी टकसाल और दस्तार के खिलाफ निंदनीय शब्दावली इस्तेमाल कर रहे थे। इस कारण शहीद बाबा दीप सिंह के साथ जुड़ी संस्था दमदमी टकसाल के सिंहों व आम संगत में रोष पैदा होना स्वाभाविक था जो टकराव के रूप में सामने आ गया।
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