चंडीगढ़। पुरानी किताबें, आधी टूटी पेंसिल और आधे इस्तेमाल किए रबड़, जो घरों के कोने में धूल फांकते थे। आज वह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रहे हैं। यह मुमकिन हो पाया है छह साल पहले संदीप की ओर से शुरू किए ‘रद्दी से शिक्षा’ अभियान के तहत।
आठवीं तक बच्चों को सरकारी स्कूल में मुफ्त शिक्षा और किताबें मिलती हैं लेकिन उसके बाद उन्हें स्वयं से पुस्तकें और फीस भरनी पड़ती है। ऐसे में जो बच्चे आठवीं के बाद पढ़ाई और किताबों का खर्च पूरा नहीं कर पाते संदीप ने उनके लिए कुछ करने की ठानी। सेक्टर-39 निवासी संदीप ने लोगों से उनकी पुरानी किताबें और स्टेशनरी का सामान लेकर बच्चों में बांटना शुरू किया। सात साल के अंतराल में वह अपनी सामाजिक संस्था के जरिये बच्चों की पढ़ाई के लिए विभिन्न अभियान चला रहे हैं।
शहर में बनाए सार्वजनिक पुस्तकालय
पीयू समेत सेक्टर-34, 44 और 48 में उन्होंने सार्वजनिक पुस्तकालय बनाए हैं, जिसे वह लाइब्रेरी ऑफ ऑनेस्टी कहते हैं। राहगीर मुफ्त में कोई भी किताब पढ़ सकते हैं। धनास स्मॉल फ्लैट स्थित गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल में ज्ञान का सफर पुस्तकालय बनाया है। संदीप ने बताया पुस्तकालय को बच्चे ही चलाते हैं।
100 बच्चों की पढ़ाई का उठाते हैं खर्च
संदीप अनाथ व एक अभिभावक के न होने पर शहर के 100 बच्चों की पढ़ाई का खर्च दे रहे हैं। करीब 500 बच्चों को पढ़ाई की सामग्री, पुस्तकें, स्टेशनरी आदि का सामान उपलब्ध करवाते हैं।
समाज के प्रति कार्य करने का जुनून
निरंतर बच्चों को शिक्षा दिलाने में जुटे संदीप ने बताया एक बार समाज की कमी देख लेने पर आप उसे अनदेखा नहीं कर सकते। उनके काम से जब कोई बच्चा 12वीं के पेपर देता है या नेट परीक्षा पास करता है तो उन्हें बहुत खुशी होती है। बच्चों की प्रगति ही उनकी प्रेरणा है।