एडवोकेट मलिक ने बताया कि सीआरपीसी-311 के तहत गवाहों को गवाही के लिए समन जारी कर बुलाया जाता है। समझौता ब्लास्ट मामले में सुनवाई के लिए इन गवाहों को बुलाया जाएगा या नहीं, इसका फैसला 14 मार्च को हो सकता है।
68 यात्री मारे गए थे
समझौता ब्लास्ट में 68 यात्री मारे गए थे, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए थे। मारे गए लोगों में अधिकतर पाकिस्तान के रहने वाले थे।
कोर्ट परिसर के बाहर दिनभर रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
समझौता ब्लास्ट मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। सोमवार को विशेष एनआईए अदालत में समझौता ब्लास्ट के मुख्य आरोपी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजेंद्र चौधरी को पेश किया गया। मामले में सोमवार को फैसला आने की उम्मीद के चलते पुलिस का कड़ा पहरा रहा।
वहीं कोर्ट परिसर में सीआईडी भी सादी वर्दी में तैनात रही। आलाधिकारियों को कोर्ट के बाहर की जानकारी दी गई। कोर्ट के बाहर कमांडो के अलावा पुलिस बल के जवान तैनात रहे। कोर्ट परिसर में बिना चेकिंग के किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया। कोर्ट का फैसला चार बजे आने की उम्मीद थी लेकिन पाकिस्तान से मेल आने के बाद सुनवाई टल गई।
पंचकूला में कोर्ट परिसर के बाहर वकीलों और आम लोगों में चर्चाओं का बाजार दिनभर गर्म रहा। कुछ वकील फैसले का कयास लगाते नजर आए। कुछ बोले की सभी आरोपी बरी होंगे तो कुछ ने सजा होने की बात कही। कोर्ट में आने वाले सुरक्षा कर्मी सहित सभी लोग फैसले पर चर्चा करते रहे।
बता दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिन चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 में बम धमाका हुआ था। हादसे में 68 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में 16 बच्चे भी शामिल थे। हादसा इतना भीषण था 19 मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई। ट्रेन दिल्ली से लाहौर जा रही थी। धमाके में जान गंवाने वालों में अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक थे।
एनआईए ने मामले की जांच में 8 लोगों को आरोपी बनाया। इनमें स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी व कमल चौहान के खिलाफ यह मुकदमा एनआईए कोर्ट में चल रहा है, जबकि तीन आरोपी पहले ही भगोड़े करार दिए जा चुके हैं। वहीं, एक आरोपी की मौत हो चुकी है। विस्फोट हरियाणा के पानीपत जिले में चांदनी बाग थाने के अंतर्गत सिवाह गांव के दीवाना स्टेशन के नजदीक हुआ था।
- भारत-पाकिस्तान के बीच एक सप्ताह में दो दिन चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 में बम धमाका हुआ था।
- 20 फरवरी 2007 को इस मामले की जांच के लिए हरियाणा पुलिस की ओर से एसआईटी का गठन किया गया था।
- 26 जुलाई 2010 को मामला एनआईए को सौंपा दिया गया था ।
- एनआईए ने 26 जून 2011 को पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले में 224 गवाहों के बयान दर्ज हुए थे। इसमें कुल 302 गवाह बनाए गए थे।
मैं स्पेशल एनआईए कोर्ट को सैल्यूट करता हूं। पाकिस्तान की सरकार को यहां से भेजे गए समन नहीं मिले हैं। मुझे लगता है जो पकड़े गए हैं वो बेकसूर भी हो सकते हैं इसलिए गवाही जरूरी है। मुझे किसी तरह का कोई खतरा नहीं। मैंने कोई सुरक्षा नहीं ली है। -मोमिन खान, अर्जी लगाने वाले वकील
अदालत ने इस अर्जी पर सुनवाई करने के लिए 14 मार्च का दिन मुकर्रर किया है। अब 14 मार्च को तय होगा कि आखिर पाकिस्तान के इन गवाहों को गवाही का मौका मिलेगा या फिर अदालत अब तक की चली सुनवाई के आधार पर अपना फैसला सुनाएगी। -एससी शर्मा, वकील, बचाव पक्ष