मणिपुर में वर्ष 2023 में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय और कुकी समुदाय के बीच हुई हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान चली गई, वहीं लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा। इन सबके बावजूद यहां युवाओं में क्रिकेट के प्रति लगाव देखते ही बनता है।
वीनू मांकड़ ट्रॉफी में चंडीगढ़ पहुंची मणिपुर की टीम के कप्तान मैक्स ने टीम को मिली शुरुआती जीतों से काफी खुश है, लेकिन मणिपुर की हिंसा को याद करते हुए इनका दर्द छलक उठता है। घटना को याद करते हुए इन्होंने बताया कि इंफाल के लिकहोन में मेरे पिता का घर था। जिस दिन वहां पर हिंसा फैली उससे कुछ दिन पहले ही मैं और मेरा परिवार घर से 30 किलोमीटर दूर अपने मामा के घर पर थे। उस हिंसा में लिकोन स्थित हमारा पूरा घर जला दिया गया। उस समय मेरा पूरा परिवार काफी डर गया था। हमारी अपने घर वापस जाने की हिम्मत नहीं हुई।
मणिपुर क्रिकेट टीम में बतौर बल्लेबाज के तौर पर खेलने वाले रॉबिंसन ने बताया कि हम लोग मैदानी एरिया में रहते हैं। हमें पहाड़ी एरिया पर जाने की अनुमति नहीं है। हाईवे की और भी जाना माना है। ऐसे में हम सीमित जगह तक ही क्रिकेट के मैदानों पर खेल सकते है। हिंसा में हमारे एरिया का काफी नुकसान हुआ है। उस समय वहां पर डर का माहौल भी था। रॉबिंसन ने कहा कि तनाव की स्थिति नहीं
मणिपुर टीम के सहायक कोच राजकुमार ने बताया कि हमारे यहां पर अभी क्रिकेट का इंफ्रास्ट्रकचर, क्रिकेट ग्राउंड और भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि कई महीने वहां पर बारिश का मौसम रहता है। जून-जुलाई से लेकर अक्तूबर-नवंबर तक बारिश रहती है। वहीं खेल के लिए करीब छह क्रिकेट मैदान हैं। अभी वहां पर क्रिकेट स्टेडियम बनाया जा रहा है। क्रिकेट के अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते हम लोग क्रिकेट का अभ्यास करने के लिए इंदौर जाते हैं।