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Chandigarh News: परिवार पर प्रताड़ना से दुखी होकर रुचिका ने दे दी थी जान

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टेनिस की उभरती खिलाड़ी थी रुचिका, छेड़खानी की शिकायत देने के बाद भाई पर दर्ज हुए थे 11 मामले
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 14 वर्षीय रुचिका गिरहोत्रा उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी थी। 12 अगस्त 1990 को हरियाणा के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) एसपीएस राठौर जो उस समय हरियाणा लॉन टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे, पर रुचिका ने छेड़खानी का आरोप लगाया। राठौर पर रुचिका के परिवार को प्रताड़ित करने का भी आरोप था। अपने परिवार पर हो रहे अत्याचार से तंग आकर 28 दिसंबर 1993 को रुचिका ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली।

सरकारें भी थी मेहरबान
पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर पर हरियाणा की सरकारें भी मेहरबान थीं। तीन सितंबर 1990 को पुलिस जांच में राठौर को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। 1991 में राठौड़ के खिलाफ आरोपपत्र की मंजूरी दे दी गई। अप्रैल 1994 में भजनलाल सरकार के समय राठौर पर लगे आरोप हटा दिए गए और उन्हें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के रूप में पदोन्नत किया। 11 मई 1996 को बंसीलाल की सरकार ने राठौड़ को डीजीपी के रूप में पदोन्नत किया। इसी दौरान पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रुचिका छेड़छाड़ मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया। जांच के आदेश के कुछ ही दिन बाद बंसीलाल सरकार ने राठौर को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद पर बहाल किया। 1999 में ओम प्रकाश चौटाला की सरकार में विभागीय जांच में राठौर को छेड़छाड़ मामले से बरी कर दिया गया। साथ ही 20 मई, 1999 से पूर्वव्यापी प्रभाव से उन्हें सरकार ने डीजीपी के रूप में पदोन्नत किया गया है। साल 2000 में जब सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया तो हरियाणा सरकार ने उन्हें डीजीपी पद से हटाकर छुट्टी पर भेज दिया। मार्च 2002 में राठौड़ सेवा से सेवानिवृत्त हो गए थे।
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21 दिसंबर 2009 को सीबीआई की विशेष अदालत ने राठौर को दोषी ठहराया। उन्हें छह महीने की कैद की सजा सुनाई। 25 मई 2010 को अदालत ने राठौर की सजा छह महीने से बढ़ाकर डेढ़ साल कर दी। उसके बाद राठौर को पुलिस ने फिर से गिरफ्तार कर लिया था।
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