अमेरिकन कंपनी के डायरेक्टर आफ फाइने रूपा भुल्लर
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एक दिन मुझे मेरी कुछ दोस्तों का कॉल आया...आपने तमाशा देखी कि नहीं...आप जरूर देखो। मैने तमाशा देखी और फिर जोधपुर विजिट किया...वहीं मुझे मिला मेरी किताब का टाइटल इंडिगो सन। अमेरिकन कंपनी के डायरेक्टर आफ फाइने रूपा भुल्लर की लाइफ अब साहित्य और लेखन की ओर मुड़ चुकी है।
करीब 17 वर्ष फाइनेंस में काम करने के बाद रूपा भुल्लर के इस पैशन से निकली पहली किताब लोगों के दिलों की धड़कन बन चुकी है। भारतीय संस्कृति से हमेशा प्रभावित रहने वाली रूपा भुल्लर चंडीगढ़ की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि फाइनेंस में काम करने के बाद उनको लगा कि कुछ लिखें। फिल्म देखने के बाद वह जोधपुर भी गईं और वहां काफी समय बिताया।
रूपा ने बताया कि उनकी किताब फिक्शन पर है। इस किताब में माया, आनंद, वीर जैसे कैरेक्टर हैं। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2000 में अमेरिका गईं। वहां एमबीए, सीएफए किया और फिर साफ्टवेयर कंपनी में अधिकारी बन गईं। उनको गालिब और खलील जिब्रान को पढ़ना भी अच्छा लगता है पर रबींद्रनाथ टैगोर को सबसे ज्यादा पसंद करती हैं।