चंडीगढ़। लावारिस कुत्तों के जन्म पर नियंत्रण के लिए बनाए गए 2023 के नियमों को अपनाने के बावजूद चंडीगढ़ में इसका पालन न होने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नगर निगम और एनिमल वेलफेयर बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए सेक्टर-27 निवासी आरुषि लांबा ने एडवोकेट विक्रम बराड़ व विश्वजीत बेनीवाल के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ में एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल 2023 को मार्च में अपनाया गया था। इसके तहत लावारिस कुत्तों को भोजन डालने के लिए विशेष स्थान निर्धारित करने का प्रावधान है। स्थान को निर्धारित करते यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह बच्चों के खेलने की जगह से दूर हो। इसमें कुत्तों को खाना डालने का समय तय करने का भी प्रावधान है। इसके साथ ही कुत्तों की नसबंदी के माध्यम से इनकी आबादी पर नियंत्रण के लिए नियम बनाए गए हैं।
मार्च में इन नियमों को अपनाने के बाद भी आज तक शहर में इसका पालन नहीं हुआ। याची ने नगर निगम को मांगपत्र भेजा था, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। एनिमल वेलफेयर बोर्ड दिल्ली को भी नियमों का पालन करवाने के लिए संपर्क किया गया। जब कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ तो याचिकाकर्ता ने आरटीआई से इन नियमों के पालन के बारे में जानकारी मांगी। आरटीआई का जवाब भी नगर निगम ने संतोषजनक नहीं दिया। निगम ने कहा कि नियमों का पालन करवाने के लिए एक एनजीओ को जिम्मेदारी दी गई है। नियमों का पालन कहां तक हुआ है, इस बारे में जानकारी न देते हुए यह बताया गया कि डॉग बायलॉज में संशोधन की प्रशासन तैयारी कर रहा है।
याची ने कहा कि नियमों के अनुसार लावारिस कुत्तों की आबादी रोकने की जिम्मेदारी प्रशासन की बनती है लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर नगर निगम व एनिमल वेलफेयर बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।