चंडीगढ़। नगर निगम सदन की बैठक में मुफ्त पानी और पार्किंग के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। नगर निगम के जिस एक्ट का हवाला देते हुए प्रशासन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया, उस पर सांसद मनीष तिवारी ने कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि बिना एक्ट का पालन किए प्रस्ताव रद्द किया गया। संविधान ने नगर पालिकाओं को स्वतंत्रता दी है। ये मुद्दा पार्किंग और पानी का नहीं, बल्कि निगम की स्वायत्तता और गरिमा का है। सांसद मनीष तिवारी ने प्रशासन के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन ने पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट 1976 की धारा 423 का हवाला देते हुए पानी के प्रस्ताव को रद्द किया है। तिवारी ने कहा कि यह धारा मुख्य रूप से तीन बातें कहती है। पहली, धारा के तहत उन प्रोसीडिंग्स को रद्द किया जा सकता है, जो अवैध हों जबकि 20 हजार लीटर पानी और पार्किंग के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास किया गया था। दूसरा, धारा के तहत उन प्रोसीडिंग्स को गलत ठहराया जा सकता है, जो एक्ट, रूल और रेगुलेशन के तहत नहीं हुई होती हैं, जबकि बैठक बिल्कुल जायज थी। सभी रूल और रेगुलेशन का भी पालन किया गया था। तीसरा और सबसे अहम, अगर किसी प्रस्ताव को खारिज भी करना है तो उसके लिए मेयर या आयुक्त के माध्यम से सदन को शोकॉज नोटिस दिया जाना चाहिए था, जबकि इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। वहीं, मुफ्त पार्किंग के प्रस्ताव को रद्द करने के लिए तो प्रशासन ने किसी धारा का भी हवाला नहीं दिया इसलिए सदन की तरफ से प्रशासन को इस संबंध में एक पत्र लिखा जाए और इन तीनों बातों का जिक्र किया जाए। प्रशासन की तरफ से प्रोसीजर का पालन नहीं किया गया, इसलिए 20 हजार लीटर पानी और मुफ्त पार्किंग का प्रस्ताव अभी भी खड़ा है। अगर प्रशासन धारा 423 के तहत नोटिस देता है तो नगर निगम की तरफ से जो भी जवाब बनाया जाएगा, वह सदन में भी पेश किया जाए। मनीष तिवारी ने कहा कि सदन और प्रशासन की राय अलग-अलग हो सकती है लेकिन सवाल मुफ्त पानी और पार्किंग का नहीं है, बल्कि सदन की स्वायत्तता का है।