उधर, हरियाणा सरकार व परिवहन विभाग के लिए इस बार राह बीते पांच सितंबर की हड़ताल जैसी आसान नहीं है। उस समय रोडवेज की यूनियनें दोफाड़ थीं। धनखड़, सरबत पूनिया व बधाना हड़ताल हड़ताल का समर्थन नहीं कर रहा था, इसलिए सरकार बसें चलाने में सफल रही थी। इस बार सभी यूनियनें हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के बैनर तले एकजुट हैं। सरकार समर्थित यूनियन भारतीय मजदूर संघ तटस्थ है। वैसे भी रोडवेज में इसके उतने सदस्य नहीं हैं कि अन्य 11 यूनियनों की हड़ताल को बेअसर कर सकें। सरकार और कर्मचारियों के रुख को देखते हुए साफ है कि इस बार भी टकराव तय है।
हरियाणा रोडवेज की हड़ताल को विफल बनाने के लिए सरकार व परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है। डिपुओं में सोमवार शाम से धारा-144 लागू कर दी जाएगी। इसके साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस बल, एसडीएम व सिटी मजिस्ट्रेट तैनात किए जाएंगे। हड़ताली कर्मियों पर सरकार एस्मा के तहत कार्रवाई कर बसें चलाने का पूरा प्रयास करेगी। सरकार के कड़े रुख को देखते हुए तय है कि पुलिस इस बार भी कर्मचारियों पर लाठियां भांजने से गुरेज नहीं करेगी। ऐसे में कर्मचारियों और पुलिस में झड़प होने के आसार हैं।
हड़ताल जायज नहीं, जनता से मांगा सहयोग : धनपत
परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह का कहना है कि रोडवेज कर्मचारियों की आए दिन हड़ताल जायज नहीं है। कर्मचारियों की अनेक मांगों को माना जा चुका है। 700 बसें निजी ऑपरेटरों की चलाने से रोडवेज का निजीकरण नहीं होगा। जनता से हड़ताल के दौरान सहयोग की अपील की गई है। कर्मचारियों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की तो एस्मा के तहत कार्रवाई के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।