पंजाब सेवा अधिकार आयोग के अधीन विभिन्न विभागों द्वारा प्रदान की जा रही सेवाएं अब लोगों को ऑनलाइन उपलब्ध होंगी।
इस संबंध में आयोग की ओर से मनोनीत किए गए मास्टर ट्रेनरों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए आयोग के आयुक्त डॉ. दलबीर सिंह वेरका ने बताया कि नेशनल इंफॉर्मेटिक सेंटर (एनआईसी), पंजाब द्वारा राइट टू सर्विस इंफॉर्मेशन सिस्टम (आरटीएसआईएस) साफ्टवेयर तैयार करवाया गया है।
इस संबंध में सबसे पहले अनुभव के तौर पर मोहाली को बतौर पायलट जिला चुना गया है। इसके बाद सिविल और गृह विभाग द्वारा एक्ट के अधीन दी जा रही सेवाएं ऑनलाइन हो जाएंगी, जिससे आयोग अपने स्तर पर ही फील्ड में किए जा रहे कार्यों पर नजर रख सकेगा।
आवेदनकर्ता भी अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन चेक कर सकेगा। इससे सेवाएं समयबद्ध सीमा में मिल सकेंगी और पहली तथा दूसरी अपीलेट अथॉरिटी के लेवल व अपीलों का स्टेटस भी पता चल सकेगा।
इस सॉफ्टवेयर से आरटीएस से संबंधित अलग-अलग दो विभागों द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा करने, दूसरी अपीलेट अथॉरिटी के निर्णयों के विरुद्ध दायर की रवीजन पटीशन का निर्णय करने, अपने स्तर पर सुओ-मोटो नोटिस कार्रवाई के अधीन पहली और दूसरी अपीलेट अथॉरिटी को निर्णय लेने/रिपोर्ट भेजने के लिए निर्देश देने, उपलब्ध करवाई जा रही सेवाओं की जांच करने और एक्ट के अधीन सेवाएं देने में ढील करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई करने में आसानी होगी।
उन्होंने बताया कि पहले राज्य में इस एक्ट के अधीन जनता को 69 सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही थीं, परंतु अब पंजाब प्रशासकीय सुधार आयोग की सिफारिशों के आधार पर नई अधिसूचना जारी होने के बाद इस एक्ट के तहत लोगों को 149 सेवाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है।
इस समय राज्य में इस एक्ट के तहत जनता को 149 सेवाएं 18 अलग-अलग विभागों द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही हैं। अभी तक 1,63,29,028 लोगों को इस एक्ट के तहत सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि मास्टर ट्रेनरों को ट्रेनिंग देने का उद्देश्य यह है कि वह प्रशिक्षण प्राप्त करके अपने-अपने जिलों में विभिन्न स्थानों पर बैठकें करके अधिकारियों/कर्मचारियों और आम जनता को पंजाब सेवा अधिकार एक्ट-2011 के तहत उपलब्ध करवाई जा रही सेवाओं संबंधी अवगत करवाएं।