1990 केस दर्ज हुआ, 93 गवाह थे, 232 सुनवाई हुई और 27 साल बाद फैसला हुआ, जिसमें रिटायर्ड कर्नल को सजा और जुर्माना दोनों सुनाया गया। सेना से रिटायर्ड कर्नल बलविंदर सिंह गोराया (75 वर्ष) को सीबीआई की विशेष जज गगन गीत कौर ने 27 साल पुराने आय से अधिक संपत्ति मामले में मंगलवार को पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
सीबीआई ने रिटायर्ड कर्नल के खिलाफ अगस्त 1990 में भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13 (1) (ई), धारा 13 (2) के तहत केस दर्ज किया था। वहीं सीबीआई की विशेष जज ने अवैध तरीके से कमाए गए 66,94,455.82 रुपये भी रिकवर करने के आदेश दिए हैं। सेक्टर-9 सी निवासी रिटायर्ड कर्नल गोराया के खिलाफ सीबीआई ने अगस्त 1990 में आय से अधिक संपत्ति होने पर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था।
उन्होंने एक जनवरी 1987 से आठ अगस्त 1990 तक के बीच अवैध तरीके से आय से ज्यादा प्रापर्टी जोड़ी थी। सीबीआई की ओर से केस की पैरवी सीनियर सरकारी वकील पीके डोगरा और सरकारी वकील केपी सिंह ने की। वहीं बचाव पक्ष की ओर एडवोकेट का कहना है कि वह सजा के खिलाफ जल्द ही हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
सीबीआई में दर्ज एफआईआर के अनुसार गोराया ने हेडक्वार्टर वेस्टर्न कमांड में कर्नल जनरल स्टाफ (इंजीनियरिंग विंग) में तैनाती के दौरान भ्रष्टाचार और अवैध तरीके से कमाई गई आय से संपत्ति खरीदी थी। सीबीआई के अनुसार रिटायर्ड कर्नल ने 72.69 लाख रुपये अवैध तरीके से अर्जित किए थे। हालांकि अदालत में अवैध कमाई करीब 67 लाख रुपये ही साबित हो सके।
दिसंबर 1987 से पहले बीएस गोराया और उनके परिवार के सदस्यों के खाते में 4,50,772 रुपये थे, लेकिन 7 दिसंबर 1987 से 31 मार्च 1990 के बीच गोराया के जम्मू एवं कश्मीर बैंक, चंडीगढ़ के खाते में 67,63,767 और उनके परिवार के सदस्यों के खातों में 5,69,061 रुपये जमा हुए थे।
इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ सेक्टर-9 में घर खरीदा था। इस पर उन्होंने 5 लाख रुपये पुननिर्माण पर भी खर्च किया था। इसके अलावा उनके परिवार के सदस्यों के खातों में भी अलग-अलग समय में काफी पैसा जमा कराया गया था।