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1990 में केस दर्ज, 232 सुनवाई और 27 साल बाद फैसला, रिटा. कर्नल को सजा-जुर्माना

Wed, 23 Aug 2017 01:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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retired colonel balvinder singh goraya
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1990 केस दर्ज हुआ, 93 गवाह थे, 232 सुनवाई हुई और 27 साल बाद फैसला हुआ, जिसमें रिटायर्ड कर्नल को सजा और जुर्माना दोनों सुनाया गया। सेना से रिटायर्ड कर्नल बलविंदर सिंह गोराया (75 वर्ष) को सीबीआई की विशेष जज गगन गीत कौर ने 27 साल पुराने आय से अधिक संपत्ति मामले में मंगलवार को पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
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सीबीआई ने रिटायर्ड कर्नल के खिलाफ अगस्त 1990 में भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13 (1) (ई), धारा 13 (2) के तहत केस दर्ज किया था। वहीं सीबीआई की विशेष जज ने अवैध तरीके से कमाए गए 66,94,455.82 रुपये भी रिकवर करने के आदेश दिए हैं। सेक्टर-9 सी निवासी रिटायर्ड कर्नल गोराया के खिलाफ सीबीआई ने अगस्त 1990 में आय से अधिक संपत्ति होने पर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था।

उन्होंने एक जनवरी 1987 से आठ अगस्त 1990 तक के बीच अवैध तरीके से आय से ज्यादा प्रापर्टी जोड़ी थी। सीबीआई की ओर से केस की पैरवी सीनियर सरकारी वकील पीके डोगरा और सरकारी वकील केपी सिंह ने की। वहीं बचाव पक्ष की ओर एडवोकेट का कहना है कि वह सजा के खिलाफ जल्द ही हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
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सीबीआई में दर्ज एफआईआर के अनुसार गोराया ने हेडक्वार्टर वेस्टर्न कमांड में कर्नल जनरल स्टाफ (इंजीनियरिंग विंग) में तैनाती के दौरान भ्रष्टाचार और अवैध तरीके से कमाई गई आय से संपत्ति खरीदी थी। सीबीआई के अनुसार रिटायर्ड कर्नल ने 72.69 लाख रुपये अवैध तरीके से अर्जित किए थे। हालांकि अदालत में अवैध कमाई करीब 67 लाख रुपये ही साबित हो सके।

दिसंबर 1987 से पहले बीएस गोराया और उनके परिवार के सदस्यों के खाते में 4,50,772 रुपये थे, लेकिन 7 दिसंबर 1987 से 31 मार्च 1990 के बीच गोराया के जम्मू एवं कश्मीर बैंक, चंडीगढ़ के खाते में 67,63,767 और उनके परिवार के सदस्यों के खातों में 5,69,061 रुपये जमा हुए थे।

इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ सेक्टर-9 में घर खरीदा था। इस पर उन्होंने 5 लाख रुपये पुननिर्माण पर भी खर्च किया था। इसके अलावा उनके परिवार के सदस्यों के खातों में भी अलग-अलग समय में काफी पैसा जमा कराया गया था।

पहले भी हो चुकी है दो साल सजा

court
आय से अधिक संपत्ति मामले में रिटायर्ड कर्नल गौराया के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के केस में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा अटैच की गई कृषि भूमि को बेचने पर सीजेएम कोर्ट ने 8 फरवरी 2017 को उन्हें दो साल की कठोर सजा सुनाई थी। साथ ही उन पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। सीबीआई ने 1990 में कर्नल के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था।

जुलाई 1993 में उनकी अन्य प्रापर्टी को अटैच करने के लिए अदालत में प्रक्रिया शुरू की गई। सीबीआई विशेष कोर्ट ने उनके आवासीय संपत्ति अटैच किए जाने के साथ आदेश दिए थे। साथ ही कहा था कि वे जमीन से जुड़ी अन्य संपत्ति बेचने के अधिकार नहीं रखते हैं। इसके बावजूद उन्होंने होशियारपुर, पंजाब स्थित कृषि संपत्ति एक व्यक्ति को बेच दी।

इसके बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने रिटायर्ड कर्नल गोराया के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 195 के तहत प्रारंभिक आपराधिक शिकायत के आदेश दिए थे। मामले में सीजेएम कोर्ट में आपराधिक शिकायत दायर की गई थी। शिकायत की पुष्टि होने पर रिटायर्ड कर्नल के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर 206 आईपीसी  के तहत केस चलाया गया था। इसमें सीजेएम कोर्ट ने उसे दोषी पाया और उक्त सजा सुनाई।

रिटायर्ड कर्नल की संपत्ति की लिस्ट     
सेक्टर-9सी में घर, सेक्टर-34सी में दो कामर्शियल बूथ, पंचकूला सेक्टर-12 में दो और सेक्टर-2 में एक प्लॉट, मोहाली फेज-4 में एक प्लॉट, गुड़गांव सेक्टर-15-2 में प्लॉट गुड़गांव की तहसील सोहाना में 31 कनाल 17 मरला का प्लॉट, सैनिक फार्म मेहरौली, गांव किरकी में प्लॉट, नोएडा सेक्टर-10 में कुणाल इंडस्ट्रीके नाम से कंपनी इसके अलावा भी अन्य संपत्ति रिटायर्ड कर्नल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम है। 
 
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ये है मामला 

court
सेना में कर्नल रहे बीएस गोराया के खिलाफ सीबीआई ने 6 अगस्त 1990 को आय से अधिक संपत्ति के मामले में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। जांच सीबीआई के तत्कालीन डीएसपी माखन सिंह ने की थी। 29 अप्रैल 1993 को अदालत में सीआरपीसी 173 के तहत चार्जशीट दायर की थी।

चार्जशीट के मुताबिक गौराया के पास 8 अगस्त 1990 तक कुल 82,58,379 रुपये की चल एवं अचल संपत्ति थी। इसमें से 72,69,588 रुपये अज्ञात कमाई से जुड़े बताए गए थे। 11 जून, 1993 को चंडीगढ़ प्रशासन ने डिस्ट्रिक्ट अटार्नी को कर्नल गोराया और उनके पारिवारिक सदस्यों की चल एवं अचल संपत्ति अटैच करने के लिए क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट आर्डिनेंस 1944 की धारा 3 के तहत एक अर्जी दायर करने को कहा था।

इसके बाद 5 जुलाई 1993 को जिला अदालत में अर्जी दायर की गई थी। इस कमाई को गौराया ने सरकारी पद का दुरुपयोग कर गैरकानूनी ढंग से कमाई संपत्ति बताया गया था।
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