चंडीगढ़। पीजीआई के भार्गव सभागार के बाहर का नजारा मंगलवार को बदला-बदला नजर आया। रेजिडेंट डॉक्टरों ने सड़क पर ओपीडी चलाई। खुले मैदान में टेंट के नीचे जमीन पर बैठे रेजिडेंट डॉक्टर हाथों में अलग-अलग विभागों की तख्तियां लिए खड़े थे। उनके मुंह पर मास्क लगा था। इसके साथ उनके पास खड़े अन्य रेजिडेंट डॉक्टर माइक से अनाउसमेंट कर रहे थे कि यहां मरीज देखे जा रहे हैं, आइए और अपना इलाज कराइए क्योंकि पीजीआई की ओपीडी में नए मरीज नहीं देखे जा रहे हैं। यह सुनकर देखते ही देखते कई मरीज रेलिंग पार कर अंदर पहुंच गए। कोई डॉक्टर को फाइल दिखा रहा था तो कोई एमआरआई और सीटी स्कैन की रिपोर्ट। हड़ताल पर बैठे रेजिडेंट डॉक्टर अपने उपकरण के साथ धरनास्थल पर मुस्तैद दिखे। इस दौरान आंख व कान रोग के मरीजों की भी जांच कर दवाइयां लिखी गईं। रेजिडेंट डॉक्टरों ने 50 से ज्यादा मरीजों को सड़क पर देखकर ही परामर्श दिया। इससे मरीजों ने राहत महसूस की।
उधर, पीजीआई में फॉलोअप के 3824 मरीजों का पंंजीकरण हुआ। इमरजेंसी में 242 मरीज देखे गए, जबकि 159 मरीज भर्ती हुए और 70 की सर्जरी हुई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जब तक रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल खत्म नहीं होती तब तक नए मरीजों को इलाज देना संभव नहीं है। ऐसे में पीजीआई न आएं। वहीं रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के प्रधान डॉ. हरिहरन का कहना है कि न्याय और सुरक्षा की मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। मरीजों के हित को ध्यान में रखकर सड़क पर ओपीडी चलाई गई है। सरकार को भी डॉक्टरों के बारे में सोचना होगा। वे अपने लिए कोई अलग लाभ देने की मांग नहीं कर रहे बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा चाहते हैं। बुधवार को रेजिडेंट डॉक्टर सड़क पर ओपीडी चलाने के साथ रक्तदान भी करेंगे। उधर, देर शाम को पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में एकत्रित होकर टार्च लाइट में नारी लिखकर घटना की शिकार डॉक्टर को श्रद्धांजलि दी।
जीएमसीएच-32 में 1491 मरीजाें को मिला इलाज
जीएमसीएच-32 में फैकेल्टी ने सिर्फ फॉलोअप मरीजों को देखा। इससे इलाज के लिए दूर-दराज से आए सैकड़ों नए मरीजों को निराश लौटना पड़ा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार छह नए और 1491 फॉलोअप के मरीजों को देखा गया, जबकि इमरजेंसी में 203 मरीजों का पंजीकरण हुआ। वहीं, 83 मरीज भर्ती किए गए। ओपीडी में इलाज के लिए रोहतक से आई सोनिया ने पंजीकरण न होने पर रोष जताया और कहा कि यह बिल्कुल गलत है। डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग को जल्द से जल्द पूरा कर देना चाहिए। सरकार को यह सोचना चाहिए कि 9 दिन में लाखों मरीजों का इलाज नहीं हो पाया है।
पैंट द ट्रूथ में दिखा रोष
जीएमसीएच 32 में रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल पर रहते हुए पैंट द ट्रूथ अपील के अंतर्गत 80 फीट के सफेद कपड़े पर महिला डॉक्टर की पेंटिंग के साथ लाल रंग से रंगे अपनी हथेली के निशान भरे। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि न्याय मिलने तक विरोध जारी रहेगा लेकिन मरीजों का हित प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। इमरजेंसी को बाधित नहीं किया जाएगा।