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अगर बच्चे के पैर मुड़े हुए हैं तो ये खबर पढ़ें

Fri, 24 Jan 2014 03:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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क्लबफुट की बीमारी कितने दिन में ठीक हो जाएगी, अब इसका पता आसानी से पता चल जाएगा। पीजीआई के आर्थोपेडिक टीम ने एक रिसर्च के जरिए यह कामयाबी पाई है।
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पीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ आर्थोपेडिक के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निर्मल राज गोपीनाथन ने बताया कि क्लबफुट बीमारी एक हजार बच्चों में से एक बच्चे को होती है।

बच्चों की पतली और छोटी हड्डियों के कारण इसका पता नहीं पाता था, लेकिन अल्ट्रासोनोग्राफी की मदद से पूर्वानुमान लगाया जा सकता है कि कितने दिन तक बच्चों की हड्डियां ठीक होंगी।
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यानी कितने दिन तक बच्चों के प्लास्टर लगाया जा सकता है। इस विधि से बच्चों की हड्डियों के सीधे होने की प्रक्रिया पर भी नजर रखी जा सकती है।

डा. निर्मल राज ने बताया कि अब तक इस दिशा की ओर कोई रिसर्च नहीं हुई है। यह रिसर्च अब भी जारी है। उनके इस रिसर्च पेपर को हाल ही में आयोजित 20वें एनुअल कांफ्रेंस ऑफ पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक सोसाइटी आफ इंडिया में बेस्ट पीओएसआई पेपर के अवार्ड से सम्मानित किया गया।

यह रिसर्च आर्थोपेडिक और रेडियोडायग्नोसिस विभाग के साथ मिलकर की गई थी। रिसर्च टीम में डॉ. निर्मल राज के अलावा डॉ. पेबम सुदेश, डॉ. महेश प्रकाश और डॉ. उदय शामिल थे।

क्या है क्लबफुट:
यह एक जन्मजात बीमारी है। इसमें बच्चे का एक या दोनों पैर टखने की अंदर की तरफ मुड़े होते हैं। इलाज न होने होने की सूरत में मरीज को पैर टेढ़ा करके चलना पड़ता है।
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डाक्टरों के मुताबिक हर एक हजार में से एक बच्चे को यह समस्या आती है। पचास फीसदी लोगों के दोनों पैर प्रभावित होते हैं। तकनीकी विकास से इसका इलाज संभव हो पाया है।

जागरूकता के अभाव में अब भी लोग इलाज कराने के लिए आगे नहीं आते और मरीज को जीवन भर अपंगता झेलनी पड़ती है।
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