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शोध की गुणवत्ता और रैंकिंग में होगा सुधार, पीयू ने गठित की टास्क फोर्स

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी ने नवनिर्वाचित टास्क फोर्स की मंगलवार को वीसी प्रो. राजकुमार की अध्यक्षता में पहली बैठक हुई। टास्क फोर्स गठित करने का उद्देश्य पीयू की विश्व स्तर पर रैंकिंग में सुधार, अनुसंधान शिक्षण के आउटपुट को बढ़ाना और वैश्विक छवि में सुधार करना है। बता दें कि पिछले वर्षों में पीयू का प्रदर्शन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी रैंकिग में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है।
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जानकारी के अनुसार इसी को लेकर शिक्षकों ने राय दी थी कि हर विभाग के शिक्षक से पूछा जाना चाहिए कि उनका लक्ष्य इस वर्ष किस बिंदु पर रहेगा। कितने शोध पेपर प्रकाशित किए, यह भी पूछा जाना चाहिए। शोध का उद्देश्य आम इंसान का जीवन आसान करना होना चाहिए। इन्हीं सब को ध्यान में रखते हुए पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने बैठक में बताया कि यूनिवर्सिटी में उपस्थित सभी लैब सुविधाओं को एकीकृत किया जाएगा, ताकि हर विभाग यूनिवर्सिटी में उपलब्ध संसाधनों का फायदा उठा सके। बैठक में माइक्रोबायोलॉजी के प्रो प्रिंस शर्मा, डेंटल कॉलेज के प्राचार्या डॉ. हेमंत बत्रा, चीफ मेडिकल अफसर डॉ. रपिदंर कौर, फार्मास्यूटिकल साइंसेज की अध्यक्ष प्रो. इंदुपाल कौर, माइक्रोबायोलॉजी की अध्यक्ष डॉ. डीके राखी, बायोटेक्नोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. कश्मीर सिंह, बायोकेमिस्ट्री का अध्यक्ष प्रो. नवनीत अग्निहोत्री, माइक्रोबिअल बायोटेक्नोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. रोहित शर्मा, लीगल स्टडीज की निदेशक प्रो. राजिंदर कौर, एंथ्रोपोलाजी के डॉ. केवल कृष्ण, सीआईएल के प्रो. गंगाराम, यूआईईटी के प्रो मनु शर्मा, प्रवक्ता रेणुका सालवान के साथ अन्य भी मौजूद रहे।
पेटेंट दर्ज करवाने के लिए नियुक्त किया नोडल अधिकारी
शोधकर्ताओं को शोध के बाद पेटेंट दर्ज करवाने में सबसे अधिक परेशानी आती है, क्योंकि यह काफी लंबी और जटिल प्रक्रिया होती है। इसके लिए वीसी ने एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की है, ताकि अधिक से अधिक शोधकर्ताओं को शोध कार्य को पेंटेंट करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
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समाज हित, उद्योग उपयोगी शोध में हो बढ़ोतरी
बैठक में वीसी ने कहा कि वैश्विक छवि सुधार के लिए हमें शोध को समाज के लिए उपयोगी, उद्योगों में मदद, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सार्वजनिक नीति आदि के लिए उपयोगी बनाना होगा। शोध ऐसी होनी चाहिए जो समाज के लोगों के काम आ सके। इसके साथ ही शिक्षण में भी विभागों को परस्पर सहयोग कर विद्यार्थियों को इंडस्ट्री के लिए उपयोगी बनाना चाहिए।
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