देश के सर्वोच्च चिकित्सा संस्थानों में शुमार पीजीआई के विशेषज्ञों ने कोराना काल में हजारों गंभीर मरीजों की जान बचाकर मिसाल कायम की थी। तीन हफ्ते में नेहरू एक्सटेंशन अस्पताल को कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाकर संक्रमितों का इलाज शुरू करने वाली टीम की कार्य योजना को देशभर के विशेषज्ञों के लिए नजीर के रूप में पेश किया जा रहा है। पीजीआई के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अन्य विशेषज्ञों के इस कार्य को लेकर तैयार शोध पत्र को फ्रंटियर्स पब्लिक हेल्थ जरनल ने प्रकाशित किया है ताकि देशभर के विशेषज्ञ इस उपलब्धि से अवगत हो सकें। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर सीमित संसाधन में बेहतर और त्वरित परिणाम दे सकें।
शोध पत्र के पहले लेखक प्रशासनिक अधिकारी डॉ. नवीन पाण्डेय ने बताया कि उस समय हमारी टीम ने डरने के बजाय आगे बढ़कर मोर्चा लेने की ठानी। इस साहस और सूझबूझ का ही परिणाम रहा कि हमारे द्वारा बनाए गए विशेष अस्पताल में ड्यूटी के दौरान एक भी व्यक्ति संक्रमित नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि पहली लहर में जब लॉकडाउन लगाया गया था तब हर तरफ खौफ और डर का माहौल था। एक ऐसे वायरस से बचाव की जद्दोजहद थी जिसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे में केंद्र से कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाने का निर्देश मिलना एक बड़ी जिम्मेदारी थी। उस समय दो से तीन हफ्ते में बिल्कुल नए सेटअप को तैयार करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। समय कम होने के साथ ही अन्य कई बिन्दुओं पर सीमित संसाधन के बल पर काम पूरा करना था। इसके लिए प्रशासनिक विभाग ने एनेस्थिसिया विभाग व अन्य महत्वपूर्ण विभागों से सामंजस्य बैठाकर कार्य योजना तैयार की।
वायरस को रोकना था मुख्य लक्ष्य
कार्ययोजना बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि वायरस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने से हर हाल में रोकना है क्योंकि संक्रमण हवा के माध्यम से तेजी से बढ़ रहा था इसलिए हमने हवा के रुख को काबू करने पर फोकस किया। रूट चार्ट के माध्यम से संक्रमण को एक ही जगह पर रोक दिया। उसे आगे बढ़ने का रास्ता ही नहीं दिया।
इन बिन्दुओं पर किया काम कर पाया परिणाम
- कोविड डेडिकेटेड अस्पताल में वन वे ट्रैफिक के फार्मूले को किया गया लागू
- पीपीई किट पहनने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए बनाया गया ऑडियो-विजुअल ट्रेनिंग रूम
- संक्रमित मरीजों के लिए आने वाले भोजन को रूम तक भेजने के लिए अलग रास्ता बनाया गया
- बायो मेडिकल वेस्ट के लिए अलग रूट बनाया गया
- मरीजों की जांच के नमूने को रूम से निकालकर कंटेनर के जरिए लैब तक पहुंचाया गया
- जांच रिपोर्ट मैनुअली देने के बजाय ऑनलाइन दिया
- आईसीयू के मरीजों की मॉनिटरिंग के लिए मोबाइल एप लांच किया
- मेडिकल फाइल को भी इस्टेरलाइज किया गया
- एसी का सर्कुलेशन ऑफ एयर बंद कर सिर्फ फ्रेश हवा की व्यवस्था रखी गई
पीजीआई की टीम ने डेडिकेटेड अस्पताल बनाने में वायरस के चक्र को मार्ग अवरोधित करके भेदने में सफलता प्राप्त की। इस रिसर्च के बाद एक बात को पूरी तरह से साफ है कि महामारी या ऐसी किसी भी आपात स्थिति से बचाव के दौरान सबसे पहले हमें उसके कारण पर फोकस कर उसे रोकने पर होना चाहिए। हमारी टीम ने इस पर काम कर सफलता प्राप्त की।
- प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआई