पारंपरिक पंजाबी परिधानों में कलाकारों ने पंजाबी लोक संगीत के खूबसूरत रंगों को पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे तुब्बी, अलगोजा, सारंगी, ढोल, नगाड़ा, बीन, बौंसारी, चिमटा, बुग्चू के साथ प्रस्तुत किया। ढोल की थाप और तरह-तरह के वाद्य यंत्रों की मनमोहक आवाज ने विदेशी मेहमानों को भंगड़ा और डांस करने पर मजबूर कर दिया। विदेशी मेहमानों ने पंजाबी कलाकारों के साथ भंगड़ा और गिद्दा में अपनी खुशी का इजहार किया और पंजाबी व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व करने वाले निदेशक इंस्टीट्यूशनल फंडिंग अल्फ्रेड मैकागाटो ने पंजाब के आतिथ्य की प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने पंजाब और पंजाबियों के खुलेपन के बारे में बहुत सुना था और आज उन्होंने यहां पंजाबियों की आतिथ्य परंपरा का आनंद लिया है। यहां की संस्कृति अपनी आंखों से देखी है। उन्होंने कहा कि ढोल की थाप पर अपने आपको भंगड़ा करने से नहीं रोक सके।
चीन की राजधानी बीजिंग से पहुंचे डेयुंग युआन डिप्टी डीन ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन ने भी पंजाबी लोकनृत्य भंगड़ा और पंजाबी खाने की तारीफ की और कहा कि पंजाबियों में मेहमाननवाजी का कोई मुकाबला नहीं है। मैं पहली बार भारत आया हूं। पंजाब के लोगों के दोस्ताना स्वभाव और स्वागत ने उनका दिल जीत लिया है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक अबू धाबी हेंड-उल-तायर और यूनिसेफ, न्यूयॉर्क के वरिष्ठ शिक्षा सलाहकार निकोलस रीयूज के प्रतिनिधियों ने भी ढोल की थाप पर भंगड़ा किया। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई की निदेशक एवं कुलपति शालिनी भरत ने कहा कि पंजाब भारत का ताज है और यहां के लोगों और संस्कृति की अपनी एक अलग पहचान है।