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Haryana Assembly: इस बार घटा जाटों का प्रतिनिधित्व, जानें हरियाणा विधानसभा का पूरा जाति समीकरण

Thu, 10 Oct 2024 04:59 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा विधानसभा में कई साल बाद जाट विधायकों की कम संख्या देखी गई है। 2019 में 24 और 2014 में 25 जाट विधायक चुन गए थे। जानकारों के अनुसार आमतौर पर 25 से 29 जाट विधायक चुनकर पहुंचते ही रहे हैं।
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हरियाणा विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा विधानसभा में जाटों का प्रतिनिधित्व घट रहा है। 15वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में सिर्फ 22 जाट विधायक चुनकर आए हैं। इनमें कांग्रेस के 12, भाजपा के छह, इनेलो के दो और दो निर्दलीय हैं। 
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दरअसल इस बार जाट बहुल कुछ सीटों से गैर जाट विधायक चुने गए हैं। उचानाकलां से जाट विधायक ही चुने जाते रहे हैं, मगर इस बार ब्राह्मण समुदाय के देवेंद्र अत्री चुने गए हैं। इसी तरह से गोहाना से भी गैर जाट विधायक चुने गए हैं। इस बार कांग्रेस ने 27 और भाजपा ने 16 जाट प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे।
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ओबीसी समुदाय के 14 विधायक निर्वाचित

भाजपा से ओबीसी समुदाय के सबसे ज्यादा 14 विधायक चुन कर पहुंचे हैं। पार्टी ने 22 ओबीसी उम्मीदवार उतारे थे। वहीं, कांग्रेस से ओबीसी के आठ विधायक चुने गए हैं। इसी तरह से दलित बिरादरी से कांग्रेस के नौ और भाजपा के आठ विधायक चुने गए हैं। सामान्य वर्ग की बात करें तो कांग्रेस ने आठ पंजाबियों को टिकट दिया था, इनमें से 3 जीते हैं। भाजपा ने 11 पंजाबियों को टिकट दिया था। इनमें से 9 जीते हैं।




कांग्रेस ने वैश्य समुदाय को एक टिकट दिया था और वह भी नहीं जीता। वहीं भाजपा के 5 में से दो वैश्य प्रत्याशी जीते हैं। ब्राह्मण समुदाय में भाजपा ने 11 टिकट बांटे थे, जिनमें से 7 विधायक बने हैं। कांग्रेस ने पांच टिकट बांटे, जिनमें से सिर्फ एक को जीत मिली। भाजपा ने तीन राजपूतों को टिकट दिया था, जिनमें से दो विधायक चुनकर आए हैं। वहीं, कांग्रेस ने एक को टिकट दिया था, लेकिन वे भी चुनाव जीत नहीं सके। कांग्रेस ने पांच मुस्लिमों को टिकट दिया था। पांचों जीते, लेकिन भाजपा के दोनों मुस्लिम उम्मीदवार हार गए।

भाजपा ने 33 नए चेहरे उतारे, 19 जीते

भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर को खत्म करने के लिए चुनाव मैदान में 33 नए चेहरे उतारे थे। भाजपा ने ये कदम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सलाह पर उठाया था। इनमें से 19 को जीत हासिल हुई। चुने गए अधिकतर विधायक संगठन के मजबूत कार्यकर्ता हैं। वहीं, भाजपा ने अपने छह उम्मीदवारों की टिकट बदली थी, जिनमें से चार को जीत हासिल हुई। वहीं, भाजपा इस बार कांग्रेस की नौ सीटें छीनने में भी कामयाब रही है।
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