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राहत की खबर: चंडीगढ़ प्रशासन ने ईवी-नीति 2022 में बढ़ाया कोटा, अब पूरे साल पंजीकृत होंगी पेट्रोल बाइक

Tue, 04 Jul 2023 02:25 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ प्रशासन ने डीजल बस का कोटा भी दोगुना कर दिया है। सामान ढोने वाले तीन और चार पहिया वाहनों का कोटा भी बढ़ाया गया है, लेकिन निजी कारों में पेट्रोल-डीजल वाहनों के पंजीकरण का कोटा हर साल पांच फीसदी घटा दिया गया है।
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For Reference Only - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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चौतरफा विरोध के बाद चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने सोमवार को अपनी ईवी नीति-2022 में बदलाव कर वर्ष 2027 तक के लिए बाइक, कार, बस आदि के लिए तय कोटे को संशोधित कर दिया। पहले सात जुलाई 2023 को पेट्रोल बाइकों का पंजीकरण बंद होने जा रहा था लेकिन अब इस कोटे को ढाई गुना बढ़ा दिया गया है। अब इस पूरे साल पेट्रोल बाइकों का पंजीकरण हो सकेगा। संशोधित नीति में ई-साइकिल को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव भी बढ़ाया गया है।

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प्रशासन ने सबसे ज्यादा राहत पेट्रोल दोपहिया वाहनों को दिया है। कोटा ढाई गुना बढ़ने से शहरवासियों के साथ वाहन डीलरों को भी बड़ी राहत मिली है। नीति के अनुसार, अब हर साल धीरे-धीरे पेट्रोल बाइकों को इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से बदला जाएगा और लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक पूरे शहर में पेट्रोल बाइकों का पंजीकरण बंद कर दिया जाए।

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प्रशासन ने डीजल बस का कोटा भी दोगुना कर दिया है। सामान ढोने वाले तीन और चार पहिया वाहनों का कोटा भी बढ़ाया गया है, लेकिन निजी कारों में पेट्रोल-डीजल वाहनों के पंजीकरण का कोटा हर साल पांच फीसदी घटा दिया गया है। पैसेंजर ऑटो, ई-कार (व्यावसायिक) के कोटे को यथावत रखा गया है। ईवी नीति में संशोधन की मांग पिछले काफी समय से की जा रही थी।

मेयर ने खोला था मोर्चा
मेयर अनूप गुप्ता ने भी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर प्रशासन जल्द संशोधन नहीं करेगा तो वह विरोध स्वरूप चंडीगढ़ की सीमा में बाहर से आने वाले वाहनों को रोकेंगे। इसके अलावा ऑटोमोबाइल डीलर भी संशोधन की मांग कर रहे थे। 

बता दें कि प्रशासन ने सितंबर 2022 में नीति को लागू किया था और अगले पांच साल के लिए लक्ष्य तय किए थे लेकिन प्रशासन ने कैपिंग बहुत सख्त कर दी थी, जिसके बाद एक साल के अंदर ही नीति में संशोधन करना पड़ा।

ये अहम फैसले हुए
1. ई-दोपहिया के मौजूदा लक्ष्य को 70 फीसदी से 25 फीसदी कर दिया गया है यानी अब करीब 16 हजार पेट्रोल बाइकें पंजीकृत हो सकेंगी। इससे पहले सिर्फ 6202 बाइकें ही पंजीकृत हो सकतीं थीं।
2. ई-तीन पहिया (सामान ढोने वाले) वाहनों में लक्ष्य 40 फीसदी से घटाकर 35 फीसदी कर दिया गया है। ई-चार पहिया (माल ढोने वाले) वाहनों के लिए लक्ष्य 40 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दिया गया है जबकि ई-बसों का लक्ष्य 50 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दिया गया है।
3. ई-कार कमर्शियल के मौजूदा लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है क्योंकि मौजूदा लक्ष्य 20 फीसदी पहले ही हासिल किया जा चुका है।
4. ई-कार (निजी) के मामले में दोगुना लक्ष्य हासिल किया गया है यानी 10 फीसदी के मुकाबले 20 फीसदी लक्ष्य हासिल किया गया है। वर्ष 2024 के लिए संशोधित लक्ष्यों में 5 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
5. इंसेंटिव के लिए ई-चार पहिया वाहनों की एक्स-शोरूम कीमतों में 20 लाख कैपिंग को हटाने का फैसला हुआ है, लेकिन प्रोत्साहन की कैपिंग (1.5 लाख) पॉलिसी में पहले की तरह तय रहेगी।
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6. अब से सरकारी विभागों में सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन ही खरीदे जाएंगे।
7. ई-साइकिलों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी को तीन हजार रुपये से चार हजार रुपये या कीमत का 25 फीसदी किया गया है।
8. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए सब्सिडी जारी करने से पहले ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) का प्रमाणन जरूरी होगा।

बाहरी वाहनों को रोके बिना कार्बन न्यूट्रल का लक्ष्य नहीं होगा पूरा : मेयर
मेयर अनूप गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति व्यवहारिक नहीं है। शहर में पेट्रोल की बाइकों को बंद करने से कोई लाभ नहीं होगा, क्योंकि रोजाना लाखों गाड़ियां पंजाब और हरियाणा समेत अन्य राज्यों से चंडीगढ़ में दाखिल होती हैं। ऐसे में प्रशासन कार्बन न्यूट्रल का अपना लक्ष्य कैसे पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि पहले बाहर से आने वाली गाड़ियों पर लगाम लगाने के लिए कुछ करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर पेट्रोल की बाइकों व अन्य वाहनों का पंजीकरण बंद कर दिया जाएगा तो गाड़ियां मोहाली और पंचकूला में पंजीकृत होंगी, लेकिन चलेंगी चंडीगढ़ में ही। ऐसे में इस नियम से सिर्फ बिजनेस बाहर जाएगा। उन्होंने ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर का मुद्दा भी उठाया। कहा कि ईवी इंफ्रा अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है। चार्जिंग स्टेशन भी शुरू नहीं हुए हैं। ऐसे में वाहनों के रजिस्ट्रेशन की कैपिंग करना ठीक नहीं है।

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