प्रकाश सिंह बादल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
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पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के साथ भाजपा के रिश्ते तल्ख होते जा रहे हैं। एनडीए के घटक के तौर पर शिअद को मिलने वाले मान-सम्मान में खटास आ गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का घेराव करने के मामले में अकाली नेता बिक्रम मजीठिया सहित नौ विधायकों पर दर्ज हुआ केस इसका ताजा उदाहरण है। राजनीतिक नजरिये से देखा जाए तो भाजपा आलाकमान हरियाणा के जरिए पंजाब में चुनाव की जमीन तैयार कर रहा है।
केंद्र के तीन कृषि कानूनों को लेकर हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे को भाजपा ने हाथों हाथ लिया है। शिअद को उम्मीद थी कि शायद इस्तीफा देने के बाद मान मनौव्वल का दौर शुरू होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह इस्तीफा सहर्ष स्वीकार किया। इस घटनाक्रम के बाद न तो बड़े बादल का कोई बयान सामने आया और न ही प्रधानमंत्री का।
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अलबत्ता हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विधानसभा में शिअद विधायकों द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद सुखबीर बादल को फोन अवश्य किया, लेकिन सुखबीर ने इस पूरे प्रकरण की जानकारी न होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया। अब हरियाणा से लेकर केंद्र के शीर्ष नेता इस बात से नाराज हैं। अब इस मामले में किसानों को मुद्दा बनाकर भाजपा का विरोध कर शिअद पंजाब में चुनाव लड़ने के लिए आगे आएगा। जबकि हरियाणा भाजपा ने आलाकमान के इशारे पर इतना सख्त कदम उठाया है कि शिअद विधायकों पर केस दर्ज करवा दिया।
भाजपा पश्चिम बंगाल के चुनाव के बाद पंजाब की तरफ ध्यान देगी। इस समय पार्टी के एजेंडे में पश्चिम बंगाल का चुनाव है। पार्टी सूत्रों की माने तो बंगाल के चुनाव से फुर्सत मिलने के बाद ही भाजपा पंजाब के लिए नए सिरे से रणनीति तैयार करेगी। इस रणनीति में अकालियों को मुंहतोड़ जवाब देने का खाका तैयार किया जाएगा।
अदब की झीनी चादर का था पर्दा, वह भी हटा
पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का एनडीए में जो स्थान था, वह किसी और नेता का नहीं था। चाहें हरियाणा सीएम का शपथ ग्रहण हो या कोई अन्य समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा उन्हें आगे रखा है। बादल साहब की तबियत भी बिगड़ी तो उनका पल-पल हाल पूछा, लेकिन अब हालात बिगड़ चुके हैं और दोनों नेताओं में लंबे समय से संवाद नहीं हुआ।