केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पूरी दुनिया के बंदरगाह नुकसान के दौर से गुजर रहे हैं। बावजूद इसके भारत ने करीब 6000 करोड़ का लाभ हासिल करते हुए इस क्षेत्र में 2.6 फीसदी की बढ़त हासिल की है। देश में फिलहाल 12 बड़े बंदरगाह हैं, जबकि छह और बनाने की योजना है।
गडकरी ने चंडीगढ़ के होटल माउंट व्यू में आयोजित रीजनल एडीटर कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सागरमाला प्रोजेक्ट के जरिये बंदरगाहों के जरिये देश का आर्थिक विकास खासकर तटीय इलाकों में। उन्होंने कहा कि माल ढुलाई के लिए जल मार्ग एक बेहतर और किफायती विकल्प है। सरकार इस दिशा में काम कर रही है, ताकि देश विदेश में माल भेजने के मद में होने वाले खर्च में कमी आ सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में फिलहाल पांच अंतरजलमार्ग है, जबकि सरकार ने 106 नए जलमार्ग की पहचान की है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल ट्रांसपोर्टेशन बल्कि कम दूरी के आवागमन के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। इससे जहां खर्च में कमी आएगी तो दूसरी तरफ सड़कों पर ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या भी कम होगी। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए सरकार ने देश में 2000 वाटर पोर्ट्स बनाने की योजना तैयार की है। हरियाणा के केएमपी के 400 दिनों में निर्माण पूरा होने का दावा करते हुए गडकरी ने कहा कि कटरा के लिए भी एक्सप्रेस वे बनाए जा रहे हैं, जिससे यात्रा तय करने में 5-6 घंटे कम वक्त लगेगा।
ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने के लिए पास करना होगा टेस्ट
केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा हर साल सड़क दुर्घटनाओं को कम करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए जल्द ही नया कानून लागू होगा। छोटे शहरों में 3000 ड्राइविंग स्कूल खोले जाएंगे जबकि ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने के लिए कंप्यूटर के जरिये होने वाले टेस्ट को पास करना अनिवार्य होगा।
स्क्रैपिंग पॉलिसी होगी लागू
गडकरी ने कहा कि 15 वर्ष से पुराने भारी वाहनों के लिए नई कार स्क्रैपिंग पॉलिसी लाई जा रही है। इसके तहत भारी वाहन मालिकों को स्क्रैप में तब्दील कर, इससे रिसाइक्लिंग होने वाले आइटम निकाले जाएंगे, ताकि इसकी बिक्री की जा सके।
वाहन मालिकों को नुकसान न हो इसके लिए केंद्र, राज्य सरकारों के अलावा एजेंसियों और कार कंपनियां की ओर से करीब 4.5 लाख रुपये तक आर्थिक सहायता दी जाएगी।