चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने सेक्टर-16 स्थित क्रिकेट स्टेडियम चौक पर लाल, हरे, सफेद और नीले रंग के सजावटी लैंप लगाए लेकिन कुछ ही दिनों में ये लैंप लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गए। आधे चौक पर सजावटी लैंप को लगाने का काम पूरा हो चुका है। रोजाना लाइटें जलती भी हैं लेकिन बाकी का काम रोक दिया गया है। अब इन लैंपों को चौक से हटाने के आदेश हुए हैं।
प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने सौंदर्यीकरण के लिए लैंप स्टेडियम चौक पर लगाए हैं। चौक के चारों तरफ पोल लगाए गए हैं, जिनके ऊपर चार रंगों के लैंप लगाए गए हैं। करीब एक महीना पहले इन्हें लगाने का शुरू हुआ और कुछ ही दिनों में पोल लगा दिए गए। दो-तीन दिन में आधे चौक पर लैंप लगाने के बाद रात के समय चौक को लाल-हरे, सफेद और नीले रंग से जगमग कर दिया गया। अब समस्या ये हुई है कि चौक पर लाल बत्ती भी है और इसके बगल में लाल और हरे रंग के लैंप भी लगाए गए हैं। लाल बत्ती के बगल में लैंप लगाने से लोगों को लैंप और लाल बत्ती में भ्रम पैदा हो रहा है।
दूर से रात में जलते हुए लैंप लाल बत्ती की तरह नजर आ रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बाहर से आने वाले लोगों को हो रही है। मामला अधिकारियों तक भी पहुंचा, जिसके बाद चीफ इंजीनियर ने सजावटी लैंपों को चौक से हटाने के आदेश दे दिए हैं। यही कारण है कि आधे चौक पर लाइटें लगाने के बाद बाकी का काम रोक दिया गया। वर्तमान में आधे चौक पर लाल, हरे, नीले और सफेद लाइटें जल रही हैं, जबकि आधे चौक पर पोल लगा दिए गए हैं लेकिन उन पर लैंप नहीं लगाए गए हैं।
चौक पर नहीं, अब गार्डन में लगेंगे ये लैंप
यूटी प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि सेक्टर-16 के क्रिकेट स्टेडियम चौक पर लगाए गए लैंपों की वजह से लोग भ्रमित हो रहे थे। मामला संज्ञान में आने के बाद लैंपों को चौक से हटाने के आदेश दे दिया है। अब लैंपों को चौक से हटाकर गार्डन में लगाया जाएगा। इस पर काम शुरू कर दिया गया है।
पहले भी ऐसे कई कार्य कर चुका है इंजीनियरिंग विभाग
प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने पहले ऐसे कई कार्य किए हैं, जिन्हें बाद में ठीक करना पड़ा। पहले आधे शहर में सड़कों की डिवाइडिंग पर हरे रंग के ऊपर से नुकीले ग्रिल लगा दिए गए। बाद में विभाग को लगा कि इससे किसी को चोट लग सकती है, जिसके बाद जून के महीने में ग्रिल के नुकीले हिस्से को काट कर अलग किया गया और फिर लोहे की प्लेट की वेल्डिंग की गई। कई लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी। कहा था कि प्रशासन की तरफ से पहले खुद गलती की जाती है और बाद में उस गलती को ठीक करने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके अलावा कई लालबत्तियों से पहले टेबल टॉप बना दिए लेकिन न वहां रिफ्लेक्टर लगाए और न ही मार्किंग की गई। कई जगह कर्व भी तीखे थे, जिसकी वजह से सेक्टर-25 समेत कुछ इलाकों में हादसे हुए। इसके बाद विभाग ने सभी टेबल टॉप के कर्व को थोड़ा समतल किया ताकि गाड़ी को गुजरते हुए ज्यादा झटका न लगे।