साल 1984 के दंगा पीड़ितों की दोबारा शिनाख्त होगी। भाजपा नेता अविनाश राय खन्ना की कोशिशों के बाद केंद्र सरकार ने इस संबंध में फैसला लिया है। पंजाब सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि बाकी बचे पीड़ितों की पहचान के लिए राज्य सरकार स्तर से पहल कराई जाए।
खन्ना ने बताया कि केंद्र सरकार ने जस्टिस जीपी माथुर कमेटी की सिफारिशें मान ली हैं। यह कमेटी 1984 के दंगा पीड़ितों की शिकायतों को लेकर गठित की गई थी। पंजाब सरकार को कहा है कि पीड़ितों के वैरिफिकेशन के के स दोबारा खोले जाएं, ताकि स्कीम के तहत पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये की ग्रांट मिल सके। जस्टिस माथुर कमेटी ने दिसंबर-2015 में अपनी रिपोर्ट दी थी। राज्य सरकार को मई-2016 में आदेश जारी किए गए।
खन्ना ने कहा कि पंजाब सरकार को कहा गया है कि दंगा पीड़ित परिवारों के स्किल डेवलपमेंट को एक योजना तैयार की जाए। कमेटी ने सिफारिश की है कि पीड़ित परिवार के जितने सदस्य स्किल डेवलपमेंट स्कीम का फायदा उठाना चाहें, उठा सकते हैं। खन्ना ने पिछले साल फरवरी में स्पेशल मोशन के जरिए राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने पीड़ितों की पहचान और उनकी समस्याएं दूर करने को कमेटी गठित करने की मांग की थी।
उसके जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि उन्होंने जस्टिस माथुर कमेटी की सिफारिशें मान ली हैं। पंजाब सरकार को तीन महीने के अंदर पीड़ित परिवारों की पहचान को कहा गया है। राज्य सरकार ही ग्रांट देगी, जिसे बाद में केंद्र अदा करेगा। केंद्र ने पंजाब सरकार से उन सभी परिवारों की जानकारी मांगी है जो दंगों के बाद दिल्ली से उजड़ कर पंजाब आ बसे थे। जिन्हें अभी तक एक्स-ग्रेशिया ग्रांट नहीं मिल सकी है।