पठानकोट पुलिस ने जिले में 477 असलहा धारकों के लाइसेंस को रद्द करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में पुलिस ने एक लाइसेंस पर कई हथियार, आपराधिक मामलों, मौत और अन्य श्रेणियों को आधार बनाया है। पठानकोट के एसएसपी हरकमलप्रीत सिंह खख ने बताया कि पंजाब में गन कल्चर को खत्म करने और हिंसा पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जिले के सभी हथियार लाइसेंसों की समीक्षा करने का फैसला किया गया था। इसके अलावा सरकार ने जिला कलेक्टर के व्यक्तिगत सत्यापन के बिना नए लाइसेंस जारी करने पर भी रोक लगा दी है।
एसएसपी ने बताया कि जिले की सभी सात गन शॉप के स्टॉक और दस्तावेजों की जांच गजटेड अधिकारियों ने की है। इस मुहिम में असलहा धारकों के रवैये, पते समेत अन्य तथ्यों की जांच की गई। इसके बाद 477 लोगों के लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई है।
पठानकोट में 3279 असलहा धारकों की हुई जांच
एसएसपी खख ने बताया कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जिले में लगभग 3279 शस्त्र लाइसेंस हैं और जांच के लिए पठानकोट के सभी पुलिस स्टेशनों को डीएसपी रैंक के अधिकारियों में बांटा गया। इन्हें संबंधित एसएचओ के साथ जांच को पूरा करने का समय दिया गया। यह सत्यापन अभ्यास सभी पुलिस टीमों ने निर्दिष्ट समय सीमा में समाप्त किया है।
उन्होंने बताया कि जांच में पाया गया कि 41 लाइसेंस धारकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे। 180 लाइसेंस धारकों की मृत्यु हो चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि 250 शस्त्र लाइसेंस धारक अपने लाइसेंस रद्द करने को तैयार हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं है कि वे वृद्धावस्था या अन्य व्यक्तिगत कारणों से इन बंदूकों को रखने में सक्षम हैं। एसएसपी ने बताया कि छह व्यक्तियों के पास उनके लाइसेंस पर दो से अधिक हथियार होने का पता चला था। यह आर्म्स एक्ट में हालिया संशोधन के तहत अवैध है।
अब चलेगा छापामारी अभियान
एसएसपी ने बताया कि आने वाले दिनों में विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जाएगी। इस अभियान के तहत समारोहों पर नजर रखी जाएगी ताकि किसी जश्न में फायरिंग न हो सके। बताया कि पठानकोट जिले में सोशल मीडिया पर हथियारों के महिमा मंडन का एक मामला दर्ज किया गया है और हथियारों को जब्त कर लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई है। एसएसपी खख ने लोगों से सोशल मीडिया, सामाजिक सभाओं, धार्मिक स्थलों, विवाह समारोहों और अन्य कार्यक्रमों समेत सार्वजनिक रूप से हथियारों के प्रदर्शन से परहेज करने का आग्रह किया क्योंकि हथियार की ब्रांडिंग करना आर्म्स एक्ट के तहत अपराध है।