एक तरफ अकाली दल धूरी उपचुनाव जीतने को लेकर पूरा जोर लगा रहा है, तो दूसरी ओर इस बार भी कांग्रेस के नेता गुटबाजी में उलझे नजर आ रहे हैं। इस इलाके में कैप्टन अमरिंदर सिंह गुट का प्रभाव है। फिर भी इस गुट ने उप चुनाव से दूरी बनाए रखने का मन बना लिया है।
जाहिर है पार्टी के नेताओं के इस रुख से धूरी में भी संगरूर लोकसभा चुनाव की कहानी दोहराने के आसार नजर आ रहे हैं। संगरूर लोकसभा हलके में पांच विधायक कांग्रेस और चार शिअद के थे। इनमें बरनाला से केवल ढिल्लों, भदौड़ से मोहम्मद सदीक, महल कलां से हरचंद कौर, धूरी से अरविंद खन्ना और लहरागागा से रजिंदर कौर भट्ठल शामिल थीं।
भट्ठल को छोड़कर बाकी चारों विधायक कैप्टन गुट के हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान ये चारों ही नदारद थे। अरविंद खन्ना बाहर चले गए थे। मोहम्मद सदीक अमृतसर और केवल ढिल्लों आनंदपुर साहिब में थे। हरचंद कौर भी चुनाव मैदान में खुलकर सामने नहीं आईं।
नतीजतन यहां पार्टी को नुकसान का सामना करना पड़ा था। बाद में विजय इंदर सिंगला ने पार्टी हाईकमान से विधायकों की गैरहाजिरी की शिकायत भी की थी। अब प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने सिंगला को ही धूरी का चुनाव इंचार्ज बनाकर फिर से विवाद को हवा दे दी है।
धूरी के पूर्व विधायक खन्ना तो यहां हैं नहीं। साथ केहलकों के विधायकों के भी चुनाव में न उतरने के आसार हैं। इस क्षेत्र में ज्यादातर नेता कैप्टन गुट के ही हैं। वे भी चुनाव से दूर ही रहेंगे। हालांकि बाजवा खुद एक या दो अप्रैल से धूरी में कैंप करेंगे।
इसके चलते कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पहले ही धूरी न जाने का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि सत्ता के दो केंद्र होने से वर्कर असमंजस में रहेंगे। लिहाजा अब धूरी की कमान पूरी तरह बाजवा के हाथों में ही रहेगी। हालांकि बाजवा का इस क्षेत्र में कोई खास प्रभाव नहीं है।