पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने ही पार्टी प्रदेशाध्यक्ष पर पलटवार किया है। उन्होंने साफ कहा कि मैं कांग्रेस का विधायक हूं और मेरा हर कार्यक्रम कांग्रेस का कार्यक्रम है। वे यहां जाट भवन के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
पत्रकारों ने उनसे पूछा था कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर आपके कार्यक्रमों को निजी कार्यक्रम बता रहे हैं। गौरतलब है कि शनिवार को तंवर ने जींद में कहा था कि पूर्व सीएम हुड्डा द्वारा किए जा रहे कार्यक्रम उनके व्यक्तिगत हैं। कांग्रेस के केवल वही कार्यक्रम होते हैं, जो पार्टी के प्लेटफार्म पर किए जाते हैं।
कार्यक्रम में पूर्व सीएम ने जाट आरक्षण को लेकर सभी को एकजुट होने का इशारा किया। साथ ही समाज के युवाओं और नई पीढ़ी को सही दिशा देने के लिए शिक्षा पर जोर देने की भी बात कही। जाटों को आरक्षण के सवाल पर उन्होंने कहा कि गेंद एनडीए सरकार के पाले में है।
किसानों को नुकसान मामले में भाजपा पर वार
बेमौसम बारिश से किसानों को हुए नुकसान के सवाल पर कहा कि पता चलता है कि किसानों के प्रति भाजपा कितनी जिम्मेदार है? किसानों को भारी नुकसान हुआ, लेकिन उनके केंद्रीय मंत्री चंडीगढ़ से ही रिपोर्ट ले लौट गए। उन्हें किसानों के बीच जाना चाहिए था।
खरीद के लिए एफसीआई को बीच में आना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर किसानों और आढ़तियों दोनों को नुकसान होगा। हमारे वक्त में भी ऐसा हुआ था कि एफसीआई ने खरीद से हाथ खींचने की बात कही थी। मैं खुद दिल्ली जाकर मिला और एफसीआई ने खरीद की।
सीएम खट्टर पर साधा निशाना
पत्रकारों ने सवाल किया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सरकारी नौकरी को गुलामी का परिचायक बताया है। इस पर हुड्डा ने कहा कि जिसकी जैसी सोच होगी, वह वैसी ही बात करेगा। कृषि और पशुपालन से जुड़े एक अन्य सवाल पर कहा, हमने डेयरी उद्योग को बढ़ाने का काम किया था। हमने प्रदेश को डेनमार्क बनाने का ख्वाब देखा था।
स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करे भाजपा
पूर्व सीएम ने कहा कि भाजपा ने स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के लिए कहा था। अगर रिपोर्ट लागू कर दी जाए तो किसानों की समस्याओं का समाधान हो जाएगा। फसलें बर्बाद हो गईं, लेकिन सरकार सही गिरदावरी नहीं करा पाई।
सुना है जिसका शत प्रतिशत नुकसान हुआ है उनका एक एकड़ पर दस हजार रुपये मुआवजा तय किया गया है। जो राशि इन्होंने तय की है वह तो हमने पहले ही तय कर दी थी। आज किसान को ज्यादा मुआवजा देना होगा। हमने मांग की है कि किसानों को प्रति एकड़ 20 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए।