पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी होते ही कांग्रेस में बगावत तेज हो गई। दूसरी सूची में 16 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जाने के बाद अमरगढ़ से घोषित प्रत्याशी ने तो चुनाव लड़ने से ही मना कर दिया।
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दूसरी ओर, खेमकरण से पिता का टिकट काट कर बेटे को देने के बाद परिवार में ही कलह शुरू हो गया है। घोषित प्रत्याशी के पिता और भाई ने आजाद प्रत्याशी के तौर पर खड़ा होने का एलान किया है। पार्टी में हो रहे विद्रोह से निपटने के लिए नेतृत्व को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
कैप्टन के मनाने पर माने सुरजीत धीमान
कांग्रेस की दूसरी सूची में घोषित अमरगढ़ से कांग्रेस के उम्मीदवार सुरजीत धीमान ने टिकट बंटवारे में देरी का हवाला देते हुए पहले चुनाव लड़ने से मना कर दिया। उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखा, 2012 में भी पार्टी ने मुझे चुनाव से मात्र 20 दिन पहले टिकट दी। मैंने पार्टी के आदेश का पालन किया।
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इस बार भी टिकट बंटवारे में देरी की, जिसके कारण मैंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। बाद में कैप्टन अमरिंदर सिंह के मनाने पर चुनाव लड़ने को राजी हो गए। इसके बाद धीमान ने फेसबुक से अपनी पोस्ट डिलीट कर दी।
उसके बाद नई पोस्ट डालकर धन्यवाद किया और उम्मीदों पर खरा उतरने की बात कही। उधर, कैप्टन अमरिंदर ने कहा है कि धीमान पहले ही अपनी फेसबुक पोस्ट को डिलीट कर चुके हैं, जिसने विवाद पैदा कर दिया था। यह बयान मात्र एक भावनात्मक गुबार था, जो उन्होंने टिकट मिलने में कथित देरी के चलते जाहिर किया था।
खेमकरण में पुत्र को मिला टिकट तो पिता व भाई हुए बागी
पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
उधर, खेमकरण विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो चुनाव हारे पूर्व कैबिनेट मंत्री गुरचेत सिंह भुल्लर की टिकट काटकर उनके छोटे बेटे सुखपाल सिंह भुल्लर को देने से परिवार में बगावत हो गई है। टिकट की घोषणा होते ही भुल्लर परिवार दो गुटों में बंट गया है।
टिकट मिलने के बाद सुखपाल जहां अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं उनके भाई अनूप भुल्लर ने कहा है कि यदि हाईकमान ने सुखपाल की टिकट रद नहीं की तो वह खुद या पिता आजाद चुनाव लड़ेंगे।
वरिष्ठ कांग्रेसी गुरचेत भुल्लर ने इस बार भी खेमकरण हलके से टिकट के लिए अप्लाई किया था। उनके छोटे बेटे जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखपाल सिंह भुल्लर तरनतारन से टिकट के दावेदार थे।
तरनतारन की टिकट डॉ. धर्मबीर अग्निहोत्री को अलाट होते ही सुखपाल भुल्लर ने अपने पिता गुरचेत सिंह भुल्लर वाली टिकट पर दावा ठोक दिया था और 15 दिन से दिल्ली में डेरा डाले रहे। पिता की जगह खुद चुनाव लड़ने की इच्छा पार्टी हाईकमान से जाहिर की थी।
जालंधर में भी उठे विरोध के स्वर
पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
जालंधर में भी कांग्रेस की दूसरी सूची आने के साथ ही कुछ उम्मीदवारों का विरोध शुरू हो गया है। इसके अलावा पहली सूची में जिनके नाम घोषित हुए थे उनमें से भी कुछ के खिलाफ नाराजगी कम नहीं हो रही है। भदौड़ से पूर्व विधायक निर्मल सिंह निम्मा के नाम का एलान होने के बाद कांग्रेस दो गुटों में बंट गई।
निम्मा के विरोध में कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष बीबी मलकीत कौर सहोता और कांग्रेस किसान खेत मजदूर सेल के नेता परमजीत सिंह सेखों ने बड़ी संख्या में कांग्रेसी वर्करों के साथ रोष प्रदर्शन किया। दोनों ने कहा कि यदि पार्टी ने फैसला नहीं बदला तो शनिवार की बैठक में आजाद प्रत्याशी के बारे में फैसला किया जाएगा।
समराला से उम्मीदवार अमरीक सिंह ढिल्लों के खिलाफ ब्लाक समिति और मार्केटिंग सोसायटी के पूर्व चेयरमैन राजवंत सिंह कून्नर ने मोर्चा खोल दिया है। फिरोजपुर देहाती से कांग्रेस प्रत्याशी सत्कार कौर गहरी के खिलाफ टिकट के दावेदार रहे पूर्व जिला प्रधान अमरजीत सिंह घारू ने अपने आवास पर समर्थकों की बैठक बुलाई।
उन्होंने कहा कि पार्टी यदि सत्कार कौर का टिकट रद नहीं करती है तो वह अपना फैसला लेने को मजबूर होंगे। बैठक में करीब दो सौ समर्थकों ने हिस्सा लिया।
सुनाम से दमन बाजवा को टिकट, राजिंदर दीपा हुए बगावती
एक कार्यक्रम के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
सुनाम सीट से कांग्रेस के पत्ते खुलते ही यहां विरोध के स्वर उठने लगे हैं। टिकट के अन्य दावेदार पार्टी के इस फैसले से बेहद नाराज हैं। कांग्रेस ने इस बार सुनाम सीट से बिल्कुल नए यूथ चेहरे और एनएसयूआई की अध्यक्ष दामन बाजवा पर दांव खेला है। पार्टी टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे राजिंदर दीपा के समर्थकों ने दिल्ली में प्रत्याशियों की घोषणा होते ही फैसले का विरोध किया।
राजिंदर दीपा ने कहा कि पार्टी हाईकमान ने सुनाम सीट के गलत फैसला किया है। उन्होंने संभावना जताई कि जिसे टिकट दी गई है शायद उनका नाम तक वोटर लिस्ट में नहीं है। अगले कुछ दिनों के भीतर पार्टी को यह अहसास जरूर होगा कि उन्होंने बड़ा गलत फैसला किया है। पार्टी को इस फैसले की समीक्षा करनी पडेगी।
उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने यहां से अमन अरोडा और अकाली दल ने विधायक गोबिंद सिंह लोंगोवाल को चुनाव मैदान में उतारा है। स्थानीय राजनीति में दामन बाजवा एक नया चेहरा हैं और कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के माध्यम से सियासत में सक्रिय हो रहीं थीं। लेकिन नाराज पार्टी नेताओं को मनाना उनके लिए टेढी खीर साबित हो सकता है।
दूसरी तरफ दामन बाजवा ने कहा कि पार्टी और जनता की उम्मीद पर शत प्रतिशत खरा उतरेंगी। सभी पार्टी नेताओं को साथ लेकर पार्टी को मजबूत किया जाएगा।