पिता के सपने को कर रहे पूरा
रवि के पिता राकेश दहिया भी कुश्ती में देश का नाम रोशन करना चाहते थे। हालांकि आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण कुश्ती में आगे नहीं बढ़ सके थे लेकिन अपने बेटे को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फलक तक पहुंचा दिया है। रवि भी अपने पिता के सपने को पूरा कर रहे हैं।
राष्ट्रमंडल में सोने के लिए बहा रहे पसीना, लेग डिफेंस पर विशेष ध्यान
रवि दहिया ने बताया कि वह राष्ट्रमंडल में स्वर्ण पदक के लिए जमकर पसीना बहा रहे हैं। उन्हें सोने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। वह सुबह साढ़े पांच से साढ़े आठ बजे तक और शाम को साढ़े चार से सात बजे तक अभ्यास करते हैं। प्रशिक्षक महाबली सतपाल और अरुण शर्मा के निर्देशन में वह लगातार बेहतर तकनीक पर काम कर रहे हैं। लेग डिफेंस और बैलेंस पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। लेग अटैक और स्टेमिना उनके अच्छे हथियार हैं। यह विरोधी को हराने में मददगार साबित होते हैं। उनके अभ्यास की वीडियो को देखकर प्रशिक्षक लगातार नई टिप्स दे रहे हैं।
पाकिस्तान, कनाडा, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका के पहलवान बेहतर
रवि दहिया कहते हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों में पाकिस्तान, कनाडा, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका के कई पहलवान बेहतर हैं। हालांकि कड़ी मेहनत, स्टेमिना और नई तकनीक से मैं खुद को इनमें बेहतर पाता हूं। मैं सोना जीतने का ही लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा हूं। मेहनत के चलते उन्होंने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर रखे हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों के लिए ट्यूनीशिया में हुई रैंकिंग सीरीज में भाग नहीं लिया, ताकि अभ्यास के लिए अधिक समय मिल सके। वह फिलहाल बेहतर फार्म में हैं और एशिया चैंपियनशिप में स्वर्ण, इस्तांबुल में हुई रैंकिंग सीरीज में स्वर्ण और बुल्गारिया में हुए इंटरनेशनल कप में रजत पदक जीत चुके हैं।