पंजाब कैबिनेट की बैठक (फाइल फोटो)
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मंत्रिमंडल ने पंजाब राज्य बिजली बोर्ड अब पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के 16 अप्रैल 2010 से पहले के मृतक कर्मचारियों/अधिकारियों के वारिसों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने को मंजूरी दे दी है। पहले यह मुआवजा नीति के घेरे में आते थे।
इस फैसले के अनुसार तरस के आधार पर नौकरी संभावित तौर पर सिर्फ उन मामलों पर लागू होगी जहां मृतक कर्मचारी की मौत की तारीख 04 अप्रैल, 2010 से पहले थी और जिनको पहले मुआवजा नीति के अधीन विचारा गया था। इनमें वह केस भी शामिल हैं, जिनमें मुलाजिम की मौत की तारीख साल 2002 (वह साल जिसमें तरस के आधार नियुक्ति संबंधी नीति को बंद कर दिया गया था) से पहले थी।
अनुकंपा के आधार पर नौकरी की इजाजत देने वाली यह योजना वैकल्पिक है। मसलन, अगर कोई वारिस इस स्कीम के अंतर्गत तरस के आधार पर नौकरी नहीं लेना चाहते है तो उसे मुआवजा पॉलिसी के अंतर्गत पहले से ही प्राप्त लाभ या विशेष पेंशन के लाभ को बरकरार रखने की इजाजत होगी।
धार्मिक ग्रंथों को ले जाने वाले वाहनों को मोटर व्हीकल टैक्स में छूट
मंत्रिमंडल ने राज्य में अलग-अलग धर्मों के पवित्र ग्रंथों का प्रकाश करके ले जाने के लिए विशेष तौर पर तैयार वाहनों को मोटर व्हीकल टैक्स से छूट दे दी है। राज्य में ऐसे लगभग 25,000 वाहन हैं जो धार्मिक समागमों के लिए धार्मिक ग्रंथों का प्रकाश करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। पंजाब मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट-1924 की धारा 13 (3) के अंतर्गत ऐसे वाहनों पर सालाना 10,000 रुपये मोटर व्हीकल टैक्स लागू होता है।
पंजाब सरकार की तरफ से टैक्स से छूट देने के फैसले से सरकार इन वाहनों को सालाना 20 करोड़ से 25 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी। मंत्रिमंडल ने अलग-अलग धार्मिक संस्थाओं की तरफ से नगर कीर्तन सजाने/ हरिनाम के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को छूट देने का फैसला लिया है।