सहमति संबंध में रह रहे प्रेमी पर प्रेमिका की ओर से दर्ज करवाई गई एफआईआर में समझौते के आधार पर जमानत देने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इनकार करते हुए प्रेमी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत देना एक प्रकार से द्विविवाह पर अदालत की मुहर लगाने जैसा होगा, जो हिंदू मैरिज एक्ट में वैध नहीं है।
प्रेमी ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि वह शिकायतकर्ता के साथ उसकी सहमति से और बिना किसी दबाव के सहमति संबंध में रह रहा था। शिकायतकर्ता अपनी शादी से खुश नहीं थी और याची के साथ अप्रैल 2021 से सहमति संबंध डीड के आधार पर साथ रह रही थी।
याची पक्ष की तरफ से दलील दी गई कि मतभेदों के कारण महिला साथी ने दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी और अब वह शिकायत को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखती है। अब दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है और ऐसे में याची को जमानत दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि यदि समझौता स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह सार्वजनिक नीति के विरुद्ध होगा, क्योंकि अपीलकर्ता और शिकायतकर्ता दोनों ही पहले से अपने-अपने जीवनसाथी से विवाहित हैं। अदालत वर्तमान अपील को स्वीकार करके दो विवाहित व्यक्तियों को गिरफ्तारी-पूर्व जमानत की रियायत देकर उनके बीच लिव-इन संबंध पर मुहर नहीं लगा सकती। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत एक से अधिक विवाह की अनुमति नहीं है और अपील को स्वीकार करके अग्रिम जमानत देना समाज को गलत संकेत देगा। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।