फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Highcourt: लिव-इन साथी से दुष्कर्म के आरोपी को जमानत से इनकार, HC ने कहा-ऐसे संबंधों पर मुहर नहीं लगा सकते

Wed, 14 Aug 2024 03:09 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट में पहुंचे मामले में याची और शिकायतकर्ता दोनों विवाहित हैं और 2021 से दोनों सहमति संबंध में साथ रह रहे थे। बाद में मतभेदों के कारण महिला ने अपने साथी पर दुष्कर्म का मामला दर्ज करवा दिया था।
विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सहमति संबंध में रह रहे प्रेमी पर प्रेमिका की ओर से दर्ज करवाई गई एफआईआर में समझौते के आधार पर जमानत देने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इनकार करते हुए प्रेमी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत देना एक प्रकार से द्विविवाह पर अदालत की मुहर लगाने जैसा होगा, जो हिंदू मैरिज एक्ट में वैध नहीं है।
विज्ञापन


प्रेमी ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि वह शिकायतकर्ता के साथ उसकी सहमति से और बिना किसी दबाव के सहमति संबंध में रह रहा था। शिकायतकर्ता अपनी शादी से खुश नहीं थी और याची के साथ अप्रैल 2021 से सहमति संबंध डीड के आधार पर साथ रह रही थी। 

याची पक्ष की तरफ से दलील दी गई कि मतभेदों के कारण महिला साथी ने दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी और अब वह शिकायत को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखती है। अब दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है और ऐसे में याची को जमानत दी जानी चाहिए। 
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि यदि समझौता स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह सार्वजनिक नीति के विरुद्ध होगा, क्योंकि अपीलकर्ता और शिकायतकर्ता दोनों ही पहले से अपने-अपने जीवनसाथी से विवाहित हैं। अदालत वर्तमान अपील को स्वीकार करके दो विवाहित व्यक्तियों को गिरफ्तारी-पूर्व जमानत की रियायत देकर उनके बीच लिव-इन संबंध पर मुहर नहीं लगा सकती। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत एक से अधिक विवाह की अनुमति नहीं है और अपील को स्वीकार करके अग्रिम जमानत देना समाज को गलत संकेत देगा। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें