राव इंद्रजीत ने महेंद्रगढ़ के सेहलंग, कनीना और दौंगड़ा अहीर में चौधरी धर्मबीर के समर्थन में की रैली
बोले- चौधरी धर्मबीर के नामांकन के दिन की जानकारी तीन दिन तक मुझे नहीं लगने दी गई
राव इंद्रजीत के बिरादरीवाद के चक्कर में पड़ने की फैलाई गई भ्रांति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़/महेंद्रगढ़/कनीना। हरियाणा की हॉट और अहीरवाल की सीट गुरुग्राम में भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह को अपनों से ही भितरघात का खतरा सता रहा है। यह बात खुद उन्होंने सोमवार को महेंद्रहगढ़ के सेहलंग की जनसभा कही। उन्होंने कहा कि भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से भाजपा प्रत्याशी चौधरी धर्मबीर सिंह के नामांकन वाले दिन की उन्हें सूचना तक नहीं दी गई। मुझे एक दिन पहले ही पता चला। उस दिन मेरे भी कार्यक्रम पहले से तय थे, इसलिए नामांकन में नहीं आ सका। उन्होंने कनीना, दौंगड़ा अहीर में भी जनसभा की। खास बात ये है कि गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र में राव इंद्रजीत के समर्थन में हो रही रैलियों में तो जरूर भाजपा नेता एकजुट दिखते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि प्रचार में अकेले राव इंद्रजीत सिंह उतरे हुए हैं। भाजपा के शेष स्थानीय नेताओं ने राव के प्रचार से दूरी बनाई हुई है। राव इंद्रजीत सिंह खुद नुक्कड़ सभाएं और दौरे कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय और राव विरोधी नेता उनके साथ आने से परहेज कर रहे हैं। स्थानीय के अलावा, भाजपा के बड़े नेता केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र सिंह यादव भी यहां प्रचार के लिए नहीं आ रहे हैं, जबकि इससे पहले अचानक से उन्होंने गुरुग्राम में सक्रियता बढ़ा दी थी।
राव इंद्रजीत ने कहा कि हमारी पार्टी के बड़े-बड़े नेता बैठे हुए हैं और एमपी भी रह चुके हैं। उनका जिम्मा हरियाणा की 10 की 10 लोकसभा सीटें जिताने का है। उनको 3 दिन मिले थे कि इंद्रजीत सिंह को खबर करो कि चार मई को चौधरी धर्मबीर नामांकन दाखिल कर रहा है, लेकिन तीन दिन तक मुझे कानोंकान खबर नहीं लगने दी गई। जिम्मेदार किसको ठहराऊं। लोकसभा चुनाव के बाद सबकी खबर ली जाएगी। उन्होंने माना कि हो सकता है कि पार्टी में भितरघात हो, लेकिन कांग्रेस में भितरघात जगजाहिर है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने भ्रांति फैला दी थी कि राव इंद्रजीत बिरादरीवाद के चक्कर में पड़ गए हैं और चौधरी धर्मबीर को जिताना नहीं चाहते। आज आप लोगों से चौधरी धर्मबीर के लिए वोट मांगने आया हूं। उन्होंने कहा कि कोई कहे कि राव इंद्रजीत सिंह अहीर है और अहीर का कार्य करेगा तो अहीर राव दान सिंह मेरा रिश्तेदार भी था। राव दान सिंह मुझे छोड़कर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास चला गया। एक अहीर जाट का साथ दे रहा है तो वह आप लोगों को मंजूर और एक जाट मेरा साथ दे रहा है तो वह नामंजूर। इस दौरान भिवानी महेंद्रगढ़ से भाजपा प्रत्याशी चौधरी धर्मबीर सिंह, मंत्री डॉ. बनवारी लाल व लक्ष्मण सिंह यादव, पूर्व मंत्री रामबिलास शर्मा, पूर्व मंत्री ओम प्रकाश यादव, अटेली विधायक सीताराम यादव, पूर्व डिप्टी स्पीकर संतोष यादव आदि मौजूद रहीं।
जरूरी नहीं भाजपा में बड़े पदों पर बैठे नेता आगे भी बने रहें
कनीना की रैली में राव इंद्रजीत ने कहा कि हरियाणा का मानचित्र इस लोकसभा चुनाव के बाद बदलेगा। कुछ लोग कहते हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री बनेगा, जब हम बनने देंगे तभी तो मुख्यमंत्री बनेगा। कोई भ्रम में न रहे। भारतीय जनता पार्टी में परिवर्तन होगा जो लोग बड़े-बड़े पदों पर बैठे हैं, जरूरी नहीं कि वह आगे भी ऐसे ही बैठे रहेंगे। हमें पार्टी में अनुशासन लाना है।
विरोधियों ने बनाई प्रचार से दूरी
दो बार से भाजपा की टिकट पर संसद पहुंचे राव इंद्रजीत तीसरी बार भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। इससे पहले के चुनावों में राव के विरोधी उनको गच्चा देने की कई कोशिशें कर चुके हैं, लेकिन बात नहीं बनी। राव विरोधी नेता हाईकमान के सामने एकजुट नजर आते हैं और जब भी कोई बड़ी रैली होती है तो सभी एक मंच साझा करते हैं, लेकिन मंच से उतरने के बाद से सभी के तेवर बदल जाते हैं। पिछले दिनों राव इंद्रजीत सिंह के समर्थन में रेवाड़ी में हुई पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की रैली में यह साफ दिखा। पूर्व विधायक रणधीर कापड़ीवास ने बहुत छोटा भाषण दिया और राव इंद्रजीत सिंह का नाम तक न लेकर केवल भाजपा को वोट देने की अपील की। इसी प्रकार, भाजपा की केंद्रीय बोर्ड की सदस्य सुधा यादव ने भी राव इंद्रजीत के लिए चुनाव प्रचार से दूरी बना रखी है। सुधा यादव भाजपा की कद्दावर नेता और भाजपा के टिकट पर एक बार राव इंद्रजीत हरा चुकी हैं।
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विधानसभा की चल रही सियासत
राव का बड़ा कद होने और स्थानीय नेताओं को नहीं पनपने देने के चलते भाजपा का एक धड़ा राव का विरोधी है। इन विरोधियों की लंबी फेहरिस्त है। पर्यटन निगम के चेयरमैन डॉ. अरविंद यादव और राव इंद्रजीत सिंह के बीच मतभेद की दीवार पुरानी है। इनके बाद नाम आता है राव नरबीर, सुधा यादव, पूर्व विधायक रणधीर कापड़ीवास के नाम हैं। गत विधानसभा चुनावों में राव के कारण ही टिकट से वंचित रही पूर्व डिप्टी स्पीकर संतोष यादव भी अंदर खाते नाराज हैं। संतोष यादव ने सोमवार को चौधरी धर्मबीर के लिए हुई रैली में शिरकत तो की, लेकिन राव इंद्रजीत के लिए प्रचार से उन्होंने दूरी बना रखी है। इन नेताओं में से केवल सुधा यादव ही लोकसभा टिकट की दावेदार थीं, शेष सभी नेता आगामी चार माह में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों में हैं। दरअसल, इनका विरोध इसलिए है, क्योंकि राव हर विधानसभा चुनावों में अपने समर्थकों को विधानसभा का टिकट दिलाने की कोशिश करते हैं और हाईकमान पर राव के दबाव के चलते दो बार टिकटें बदली भी गई हैं। इसलिए ये स्थानीय नेता राव का विरोध करते हैं। पिछली बार अरविंद यादव रेवाड़ी से टिकट के दावेदार थे, लेकिन राव के समर्थक सुनील मुस्सेपुर को यहां से टिकट मिला था।
राव को अपनी ही टीम पर भरोसा
इधर, राव अकेले ही अपने प्रचार को धार देने में जुटे हैं। रामपुरा हाउस और राव का अहीरवाल में अच्छा प्रभाव है। राव को अपने परिवार के इसी रुतबे और गांवों में अपनी खुद की मजबूत टीम पर भरोसा है। राव रूठने और मनाने की राजनीति नहीं करते हैं और अभी तक उन्होंने प्रचार में नहीं दिख रहे नेताओं को भी साधने की कोशिश नहीं की है। राव को खुद और अहीरवाल के मतदाताओं पर भरोसा है। देखना है कि यह भरोसा कायम रहता है या फिर विरोधियों की एकजुटता काम आती है।