सांसद रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा और पूर्व सांसद डॉ. रतन सिंह अजनाला
सुखबीर बादल के इस फैसले के खिलाफ वह लोगों के बीच जाएंगे। लोगों को सच बताएंगे कि डेरा प्रमुख को माफी देने में सुखबीर बादल की भूमिका थी। उन्होंने डेरा प्रमुख और बरगाड़ी कांड पर पार्टी को संगत की भावनाओं के बारे में जानकारी दी थी। उनकी यह लड़ाई जारी रहेगी। वहीं सेवा सिंह सेखवां ने कहा कि अकाली दल के इतिहास में आज का दिन काले अक्षरों में लिखा जाएगा।
जिस लीडरशिप ने पार्टी को स्टैंड करने में कई कुर्बानी दी, उन्हें पार्टी से निकालना दुर्भाग्यपूर्ण है। सुखबीर बादल, बिक्रम मजीठिया और हरसिमरत कौर की अकाली दल में क्या कुर्बानी है। कोर कमेटी फैसला करने से पहले विचार कर लेती। इनकी यही कुर्बानी है कि ये बादल परिवार के रिश्तेदार हैं। सेखवां ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की तरफ पीठ करने वालों ने डेरा प्रमुख को माफी दी है। इसके विरुद्ध संगत को जानकारी दी जाएगी।
बेअदबी के कारण हारा अकाली दल : ब्रहमपुरा
फिरोजपुर में सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल (ब) सिखों की रक्षा के लिए बनाई गई थी, जिस पर बादल परिवार ने कब्जा कर लिया है। ब्रह्मपुरा रविवार को गांव फत्तुवाला में अपने दामाद से मिलने आए थे। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी के चलते विधानसभा चुनाव में अकाली दल को सिर्फ 14 सीटें मिली थी। उन्होंने कहा कि सिखों की रक्षा और उनके हितों के लिए नई नीति तैयार की जाएगी।
ब्रह्मपुरा ने कहा कि वह अकाली दल में ही रहेंगे और सुखबीर और मजीठिया से इस्तीफा मांगेंगे। सुखबीर और मजीठिया ने पंजाब में रेत, बजरी व केबल का व्यापार चला रखा था, जो विधानसभा चुनाव में इनका हार का कारण बना है। बड़े बादल सुखबीर और मजीठिया की सभी हरकतों से अवगत हैं, फिर भी पार्टी को बचाने के लिए उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वह अलग पार्टी नहीं बनाएंगे। सुखबीर और मजीठिया उन्हें मीटिंग करने के लिए बुला रहे हैं, लेकिन कोई भी नेता उनके साथ बैठक करने को तैयार नहीं है। इन दोनों का इस्तीफा लेकर रहेंगे।