प्रदेश सरकार की मंत्रिमंडल ब्रांच ने सचिवालय की संबंधित शाखाओं को लिखा पत्र
23 सितंबर को कार्यकाल हो चुका पूरा, 5 सितंबर को की थी इस्तीफे की घोषणा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। निर्धारित छह माह में विधायक निर्वाचित न होने पर बिजली मंत्री रणजीत सिंह की हरियाणा मंत्रिमंडल से छुट्टी कर दी गई है। गैर विधायक के तौर पर रणजीत का कार्यकाल 23 सितंबर को खत्म हो गया है। इस संबंध में मंगलवार को हरियाणा सरकारी मंत्रिमंडल ब्रांच ने प्रदेश सचिवालय की संबंधित शाखाओं राजनीतिक, आरवीए (सरकारी वाहन), लेखा और तीनों स्थापना ब्रांचों को इस संबंध में आगामी आवश्यक कार्यवाही के लिए लिख दिया है। वहीं देर रात मुख्य सचिव की वेबसाइट से इस पत्र को हटा लिया गया है।
गौर हो कि इसी माह 5 सितंबर को रानियां विधानसभा सीट से भाजपा की टिकट न मिलने से रणजीत ने मंत्रीपद से त्यागपत्र देने की घोषणा की थी, परंतु ताजा घटनाक्रम से ऐसा साफ हो गया है कि उन्होंने पहले इस्तीफा नहीं दिया था। नियमों के तहत मंत्री को सीएम के नाम इस्तीफा देना होता है और इसके बाद सीएम की मंजूरी के बाद इसे राज्यपाल को भेजा जाता है, तब इस्तीफा मंजूर होता है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एडवोकेट हेमंत कुमार ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अंतर्गत कोई मंत्री, जो निरंतर 6 महीने की अवधि तक विधानसभा का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा। 12 सितंबर को निवर्तमान 14 वीं हरियाणा विधानसभा के भंग हो गई थी।
बता दें कि 12 मार्च को जब प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल को बदलकर नायब सैनी को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया गया, तो उनके साथ शपथ लेने वाले 5 कैबिनेट मंत्रियों में रणजीत सिंह भी शामिल थे। उस समय वे सिरसा जिले की रानियां विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक थे। इसके बाद 24 मार्च की शाम रणजीत सिंह भाजपा में शामिल हो गए थे, जिसके कुछ समय बाद ही उन्हें हिसार लोकसभा सीट से पार्टी उम्मीदवार घोषित कर दिया गया, जिस कारण रणजीत ने उसी दिन विधायक पद से त्यागपत्र दे दिया चूंकि निर्दलीय विधायक रहते हुए कोई भी व्यक्ति किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो सकता अन्यथा उसे दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत विधानसभा सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।
24 मार्च से विधायक के रूप में उनका इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्वीकार होने के बाद वह गैर विधायक मंत्री थे।