चंडीगढ़। हिसार सीट से भाजपा उम्मीदवार रणजीत चौटाला एक मई को नामांकन दाखिल करेंगे। उससे पहले उनका इस्तीफा स्वीकार होने के आसार हैं। चौटाला को मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता के सामने पेश होकर अपने इस्तीफे का सत्यापन करवाना है। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद वह विधायक नहीं रहेंगे, मगर वह मंत्री के पद से इस्तीफा देंगे या नहीं यह तय नहीं है।
विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के बावजूद रणजीत चौटाला छह महीने तक मंत्री पद संभाल सकते हैं। हाईकोर्ट अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताया कि विधायक न होते हुए भी कोई व्यक्ति प्रदेश का मुख्यमंत्री या मंत्री नियुक्त हो सकता है बशर्ते उस नियुक्ति के 6 महीने के भीतर वह व्यक्ति विधानसभा का सदस्य अर्थात विधायक बन जाए। 12 मार्च को मंत्री पद की शपथ लेते समय रणजीत विधायक थे। विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद उनका मंत्रिमंडल से भी त्यागपत्र देना बनता है, जो मुख्यमंत्री के माध्यम से राज्यपाल को सौंपा जा सकता है। उन्होंने बताया, राज्य में अभी तक ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जब प्रदेश का मंत्री विधायक पद से त्यागपत्र देकर मंत्री बना रहा हो। गैर-विधायक रहते हुए रणजीत चौटाला के अधिकतम छह महीने तक तक मंत्री बने रहने की अवधि उनके विधायक पद से दिए गये त्यागपत्र के स्वीकार होने की तारीख से ही शुरू होगी। ब्यूरो