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'हनीप्रीत दो रात रुकी, पर कमरे में बैठी रोती रहती थी, न बात की न खाना खाया'

Sun, 24 Sep 2017 09:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अबोहर(पंजाब)
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Honeypreet Insan - फोटो : File Photo
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हनीप्रीत दो रात के लिए हमारे यहां रुकी, पर वो कमरे में बैठकर रोती रहती थी। उसने न तो खाना खाया और न ही किसी से बात की, बस गुमसुम बैठी रहती थी। यह खुलासा पंजाब में अबोहर के हनुमानगढ़ निवासी मदन बागला ने किया। मदन हनीप्रीत की भाभी के पिता हैं। हनीप्रीत उर्फ प्रियंका तनेजा की भारत से लेकर नेपाल तक में सरगर्मी से तलाश हो रही है, वह हनुमानगढ़ के सेक्टर 12 स्थित अपने भाई के ससुराल में दो दिन तक रुकी थी।
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जानकारी के अनुसार हनुमानगढ़ के सेक्टर 12 निवासी मदन बागला की बेटी हनीप्रीत के भाई से विवाहित है। पिछले कुछ दिनों से हनीप्रीत के हनुमानगढ़ आने और उसकी तलाश में हरियाणा पुलिस के आने को लेकर चर्चाएं हो रही थीं। मदन बागला ने बताया कि 28 अगस्त को हनीप्रीत उनके यहां आई थी। उसके साथ कई कमांडो और डेरा सच्चा सौदा से कई अनुयायी थे। हनीप्रीत उनके यहां 29 अगस्त शाम तक रुकी थी।

इसके बाद वह रात को चली गई। तब से उसके साथ उनका कोई संपर्क नहीं है। 25 अगस्त को जब सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम को दोषी करार दिया था, तब पंचकूला से राम रहीम के साथ ही हनीप्रीत चॉपर में रोहतक गई थी। वहां शाम को राम रहीम को सुनारिया जेल में ले जाया गया, लेकिन हनीप्रीत वहीं से चली गई थी।
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कमांडो हनीप्रीत से किसी को मिलने नहीं देते थे

हनीप्रीत इन्सां
मदन बागला ने बताया कि उनके यहां हनीप्रीत जब आई थी तो कमरे में गुमसुम बैठी रहती थी या फिर रोती रहती थी। कमरे के बाहर कमांडो खड़े रहते थे। कमांडो हनीप्रीत को ज्यादातर किसी से मिलने नहीं देते थे। खुद हनीप्रीत भी किसी से मिलना नहीं चाहती थी। उनके यहां दो दिन रहने के दौरान हनीप्रीत ने खाना-पीना भी लगभग न के बराबर ही किया। उसने दो-तीन बार सिर्फ दूध ही पिया।

माना जा रहा है कि हनीप्रीत के साथ आने वाले कमांडो वही थे, जो डेरा प्रमुख को जेड प्लस सिक्योरिटी के तहत सरकार ने दे रखे थे। बकौल मदन बागला उनके यहां हनीप्रीत ने परिवार के सदस्यों से ज्यादा बातचीत नहीं की। जब हनीप्रीत हनुमानगढ़ में आई, तब तक हरियाणा पुलिस ने उसके विरुद्ध कहीं कोई मामला दर्ज नहीं किया था। उन दिनों पंचकूला सहित हरियाणा के विभिन्न शहरों-कस्बों और दूसरे राज्यों में डेरा समर्थकों द्वारा हिंसा, आगजनी की जा रही थी। हालात काफी तनावपूर्ण थे।

वहीं पता यह भी चला है कि 25 अगस्त की रात को हनीप्रीत सिरसा डेरे में आई और अगली सुबह वहां से चली गई थी। 26 और 27 अगस्त को वह कहां रही, इसका किसी को कोई पता नहीं। 28 और 29 अगस्त को वह अपने भाई के ससुराल हनुमानगढ़ में रही थी। 
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9-10 सितंबर की रात को किशनपुरा उत्तराधा में थी हनीप्रीत

फाइल
मदन बागला के यहां से 29 अगस्त की रात को चले जाने के बाद हनीप्रीत के 9-10 सितंबर की रात को संगरिया के पास किशनपुरा उत्तराधा में एक डेरा समर्थक के यहां आने की जानकारी भी मिली, लेकिन पुलिस वहां नहीं गई। उस रात हनीप्रीत इस गांव में तीन-चार घंटे रुकी।

इसकी पुष्टि इससे भी होती है कि हनीप्रीत के लिए डेरा समर्थक परिवार ने रात 12 बजे दुकान खुलवाकर मिनरल वाटर की बोतलें खरीदीं। दूसरी बार हनीप्रीत जब हनुमानगढ़ जिले में इस तरह से आई, तब तक उसके विरुद्ध हरियाणा में मुकदमे दर्ज हो चुके थे और लुकआउट नोटिस भी जारी हो चुका था। ऐसे में अगर हरियाणा पुलिस सतर्क होती तो हनीप्रीत को गिरफ्तार किया जा सकता था।
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