संवाद न्यूज एजेंसी
हलवारा। लोकगायक राजवीर जंवदा का वीरवार को उनके पैतृक गांव पोनां में हजारों प्रशंसकों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। हिमाचल हादसे में घायल होने के बाद वे मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में 11 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझते रहे। बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। पार्थिव शरीर मोहाली से गांव लाया गया, जहां देर रात हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी।
सुबह अंतिम दर्शनों के लिए शव उनके घर के बरामदे में रखा गया। घर से ट्रैक्टर-ट्रॉली में शव यात्रा निकाली गई, जिसमें कई पंजाबी कलाकार भी शामिल हुए। गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के बाद यात्रा श्मशान घाट पहुंची, जहां बेटे दिलावर ने उन्हें मुखाग्नि दी। राजवीर को उनकी पसंदीदा लाल पगड़ी और मैचिंग टाई पहनाई गई, जिसे देख मां और पत्नी बेहोश हो गए। यह हादसे के बाद उनकी पहली और आखिरी तस्वीर थी। अंतिम संस्कार में लोगों ने राजवीर जंवदा अमर रहे के नारे लगाए और फूल बरसाए। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गांव पहुंचकर परिवार से मुलाकात की और उनके निधन को पंजाबी संगीत जगत की अपूरणीय क्षति बताया।
इस मौके पर कंवर ग्रेवाल, एमी विर्क, रंजीत बावा, बब्बू मान, हरभजन मान, सतिंदर सरताज सहित कई कलाकार मौजूद रहे। गांववासियों ने उस स्थल पर स्मारक बनाने की मांग की, जहां राजवीर ने अपना पहला गीत गाया था। मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए पुलिस ने गांव को छावनी में बदल दिया और प्रशंसकों को तीन किलोमीटर पैदल चलकर संस्कार स्थल तक पहुंचना पड़ा।