सिंथेटिक ड्रग के 200 करोड़ के कारोबार को ब्रेक कर अपनी वाहवाही लूटने वाली पंजाब पुलिस राजा कंदोला के बरी होने से पंजाब पुलिस को बड़ा झटका लगा है। डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी जे इलेनचेलियन को उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी किये हैं। एसएसपी ने मामले में एसपी डिटेक्टिव हरप्रीत मंडेर को जिम्मेदारी सौंपी है कि वह अदालत से पूरे आदेश की कापी के अलावा जांच व प्रोसिक्यूशन की पूरी रिपोर्ट तैयार कर सौंपे।
मामला 2 जून 2012 को थाना गढ़शंकर (जिला होशियारपुर) में ड्रग तस्करी के आरोपों में गिरफ्तार बर्खास्त इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के बयान पर केस दर्ज हुआ। केस में उस वक्त आई-20 कार व इंडिका कार में आए अमनदीप सिंह, हरजिंद्र सिंह उर्फ राजिंद्र जिनसे 50 ग्राम हेरोइन, बाइक पर आए जतिंद्र कुमार से 200 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। वहीं सुखविंद्र सिंह, हरकमलजीत सिंह उर्फ रूपा को भी गिरफ्तार किया गया था।
दोनों कारों से 34 किलो आइस बनाने वाला नशीला पदार्थ (एफ्टीमाइन) बरामद हुआ था जिसमें इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह, सीआईए इंचार्ज अंग्रेज सिंह व सतीश बाठ भी थे। जांच में आरोपियों ने कहा था कि ड्रग उनको राजा कंदोला ने दी है, जो सिंथेटिक ड्रग का कारोबार करता है। पुलिस ने राजा कंदोला को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में आईजी गुरप्रीत दियो से लेकर तत्कालीन डीजीपी ने वाहवाही लूटी थी।
दरअसल, एनडीपीएस केस में सीधी रिकवरी राजा कंदोला व उसकी गर्लफ्रेंड वान्या से नहीं हुई थी। जिस कारण अदालत ने राजा कंदोला व उसके साथी तस्कर मनजिंद्र सिंह, सुरिंद्र कौर, श्वेता अरोड़ा, अरुण कुमार व वानिया खन्ना को आरोप साबित न होने पर बरी कर दिया, जबकि इन्हीं के साथ जुड़े तस्कर अमनदीप सिंह उर्फ चीमा को 3 साल की कैद के साथ 40 हजार रुपये जुर्माना व जुर्माना न देने पर 6 मास की अतिरिक्त सजा सुनाई है।
दोषी सुखविंद्र सिंह उर्फ लड्डू को 5 साल की सजा, 40 हजार रुपये जुर्माना व जुर्माना न देने पर 6 माह कैद की सजा सुनाई है। मामले में पुलिस पर सवालिया निशान लग गया है कि क्या पुलिस ने राजा कंदोला को इस केस में गल्त फंसाया था ? या पुलिस केस की पैरवी ठीक नहीं कर पाई। इसी केस में अमनदीप चीम, सुखविंदर को सजा हो गयी है तो सवाल यह भी खड़ा हो गया है कि इन लोगों को अगर नशे की खेप राजा कंदोला ने सप्लाई नहीं की तो वह कहां से लेकर आए थे?
मामले को दर्ज करने वाले इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह खुद जेल की सलाखों के पीछे हैं और इंदरजीत कांड को लेकर ही पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा पर भी लगातार उंगुलियां उठी। इस मामले में राजा कंदोला का बरी होना भी संवेदनशील मामला बन गया है। डीजीपी ने इस मामले में अपनी साख बचाने के लिए केस को रिव्यू करने के लिए कहा है। एसएसपी होशियापुर जे इलेनचेलियन का कहना है कि मामले की जांच के लिए एक टीम एसपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में गठित की जा रही है।